April 1, 2020

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आज सरकार पेश करेगी केंद्रीय बजट जानिए क्या है आपके लिए इसमें नया

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केंद्रीय बजट पे देश के तमान लोगों की नजरें थमी हुई है। सबको मंदी के इस दौर में सरकार के इस नए बजट से काफ़ी उम्मीदे है

अब ऐसे में देखना है की सरकार का यह नया बजट किसके लिए क्या और कितना लेकर आता है इस बार।

1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी

सीतारमण का यह दूसरा बजट होगा। इससे पहले उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया था। निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। इससे पहले इंदिरा गांधी ने कुछ समय के लिए देश के वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाला था|

भाजपा सरकार के लिए बजट बेहद चुनौती भरा रहने वाला है। जब अर्थव्यवस्था की रफ्तार साढ़े छह साल के निचले स्तर पर है, ऐसे में इसे रफ्तार देने के लिए नीतियों की घोषणा करना उनके लिए कोई आसान काम नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने को लेकर तमाम घोषणाएं राजकोषीय घाटे को ध्यान में रखते हुए करनी होगी।

देश के केंद्रीय बजट से पहले गुरुवार को पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षेण 2019 – 2020

economic survey[ केंद्रीय बजट ]

पिछले साल वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए पहले ही कई घोषणाएं कर चुकी है| जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का कदम है, निर्मला सीतारमण सितम्बर 2017 से मई 2019 तक रक्षामंत्री थीं और उससे पहले वे देश की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कॉर्पोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं|

जानिए क्या कहती है देश कि आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सरकार के बजट को लेकर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया| यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आर्थिक सर्वेक्षण है| यह सर्वे मोदी सरकार के अगले पांच सालों के रोडमैप के बारे में बताता है। यहां हम इस सर्वेक्षण की खास बातें बता रहे हैं|

सर्वे में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमानों को 7 फीसदी रखा गया हैयानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद है|

वित्त वर्ष 2024-25 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को 8 फीसद की औसत रफ़्तार से बढ़ना होगा |

8 फीसदी की विकास दर को बनाए रखने के लिए सर्वे में निवेश पर जोर बढ़ाने की वकालत की गई है।

इसे भी पढ़े:- UNION BUDGET 2020 : वित्त मंत्री का ऐलान, LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

मांग, रोजगार, निर्यात और उत्पादकता बढ़ाने के लिए निवेश को अहम बताया गया है। – 2018 के मध्य से ग्रामीण आय में बढ़ोतरी शुरू हुई है।

राजनीतिक स्थिरता से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में फायदा मिलेगा।

कॉन्ट्रैक्टों का खराब निष्पादन और विवादों का निपटान अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियों में से हैं। कानूनी प्रक्रिया को रफ्तार देना शीर्ष प्राथमिकता में होना चाहिए।

बचत और ग्रोथ दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। निवेश की तुलना में बचत और बढ़नी चाहिए।

नीति निर्माताओं को सुनिश्चित करना होगा कि उनके फैसले अप्रत्याशित न हों। यानी उनका अनुमान लगा पाना संभव हो। इसके लिए कुछ चीजों की जरूरत है।

1 साफ नजरिया 2 रणनीतिक ब्लूप्रिंट 3 अपने कदमों को लगातार जांचने के लिए रणनीतिक टूल

भारतीय एमएसएमई को उन बंधनों से मुक्त किया जाना चाहिए जो उन्हें छोटा बनाए रखते हैं। एमएसएमई को इनोवेशन, ग्रोथ और रोजगार सृजन के स्रोत के तौर पर देखना चाहिए।

सर्वे गांधी जी के मूल मंत्र से प्रेरित है। यह कहता है : “कोई कदम उठाने से पहले उस सबसे गरीब व्यक्ति का चेहरा याद करें और खुद से पूछें कि क्या वह उसके लिए किसी काम का होगा।”

मालूम देता है कि निवेश की दर अपने निचले स्तर तक पहुंच चुकी है। यानी अब बढ़त का सिलसिला शुरू होगा।

जनवरी-मार्च के दौरान आर्थिक सुस्ती का कारण चुनाव से जुड़ी गतिविधियां रहीं।

नए उद्योगों में निवेश रफ्तार पकड़ रहा है।एनबीएफसी का संकट वित्त वर्ष 2018-19 में आर्थिक रफ्तार के सुस्त होने की बड़ी वजह रही।

एनपीए में कमी से पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी होनी चाहिए।

वित्त वर्ष 2018-19 में सामान्य राजकोषीय घाटा 5।8 फीसदी रहा। वित्त वर्ष 2017-18 में यह 6।4 फीसदी रहा था।

वित्त वर्ष 2019-20 में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दिख रही है।

मौद्रिक नीति समिति के रुख में बदलाव से ब्याज दरों को घटाने में मदद मिलेगी।

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