June 3, 2020

करंट न्यूज़

खबर घर घर तक

कोरोनावायरस से लड़ना हुआ मुश्किल

कोरोनावायरस से लड़ना हुआ मुश्किल
कोरोनावायरस से निपटने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने अहम फैसला किया, स्वास्थ्य और नागर विमानन मंत्रालय ने एक के बाद एक कई नोटिफिकेशन जारी किए, जिसके अमल में आने के बाद भारत 21  दिन  तक पूरी दुनिया से खुद को अलग-थलग रखने वाला। कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में संपर्क के जरिये फैलता है। इस फैसले का मतलब संपर्क घटाते हुए कोरोना के वायरस पर कंट्रोल करना है। इसिलए भारत सरकार ने कर्फूयु जैसा लॉकडाउन घोषित कर लोगो को अपने घरो के अंदर ही रहने को कहा। भारत सरकार ने दुनिया के किसी भी देश से आने वाले लोगों का वीजा 15 अप्रैल 2020 तक सस्पेंड कर दिया।सभी एयरलाइन्स को कैंसिल कर दिया गया। स्टेट बॉर्डर्स सील कर दिए गए।

21 दिन का लॉकडाउन क्यों हुआ?

चीन, इटली, स्पेन और अमेरिका जैसे देशों में कोरोना वायरस महामारी का रूप ले चुका है और इससे काफी लोगों की मौत हुई है। इन देशों में की गई स्टडी में पता चला है कि कोरोना वायरस की तबाही मचाने का पैटर्न क्या है।लॉकडाउन अब तक किये गए अध्ययन के अनुसार तीसरे हफ्ते में कोरोना का संक्रमण सबसे अधिक तेजी से होता है। लॉकडाउन इस हिसाब से विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में कोरोना के वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 21 दिन का लॉकडाउन बहुतजरूरी कदम है।

संक्रमित लोगों की पहचान

साथ ही भारत में इस लॉकडाउन का दूसरा पहलू ये है की कोरोना वायरस से आम लोगों को बचाना और संक्रमित लोगों की पहचान कर उनका इलाज करना। कोरोना वायरस का संक्रमण चक्र 14 दिनों का है, इस दौरान किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिख सकते हैं किसी में नहीं भी दिख सकते हैं। दोनों को कवर करने के लिए 21 दिन का वक्त काफी है। लॉकडाउन की अवधि में अगर सभी लोग अपने-अपने घर में रहें तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 14 दिनों के अंदर संक्रमित लोगों में इसके लक्षण सामने आ जाएंगे। इसिलए सरकार ने २1 दिन का ही लॉकडाउन घोषित किया।

क्या नियंत्रण पाना हुआ मुमकिन?

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मैथमेटिकल साइंस से जुड़े राजेश सिंह और आर अधिकारी की ओर से तैयार मॉडल ने भारत के सामाजिक संपर्क के अनोखे आयाम को दर्शाया है। इसी का हवाला देकर उनकी दलील है कि भारत के सामाजिक ढांचे की वजह से वायरस यहां चीन और इटली की तुलना में अलग बर्ताव कर सकता है। मॉडल में केस की संख्या, आयुवर्ग के हिसाब से बंटवारा, सामाजिक संपर्क ढांचे के हिसाब से भारत, चीन और इटली की तुलना की गई है। इसमें Prem et।al। नाम के एक दूसरे चर्चित संकलन का भी इस्तेमाल किया गया है जो कॉन्टेक्ट सर्वे और जनसांख्यिकीय आंकड़ों (डेमोग्रेफिक डेटा) के जरिए 152 देशों के सामाजिक संपर्क सांचे को प्रोजेक्ट करता है।

क्या है उनका रिजल्ट?

भारत जैसे देश में इस स्टेज पर आकर 21 दिन का लॉकडाउन ही सिर्फ वायरस के फैलाव को काबू में रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।लॉकडाउन को हटाते ही तेजी से दोबारा फैलाव देखा जाएगा।मॉडल ने लॉकडाउन के बावजूद 73 दिन के अंतराल में संभावित 2,727 मौतों की रिजल्ट की गणना की है। मॉडल ने घरों में तीन पीढ़ियों में संभावित संक्रमण के फैलाव का अनुमान व्यक्त किया है।भारत में 15-19 आयुवर्ग सबसे बड़ा वायरस  संवाहक या कैरियर हो सकता है। साथ ही 60-64 रिजल्ट आयुवर्ग को सबसे ज्यादा मृत्यु-दर का सामना करना पड़ सकता है।

भारत सरकार ने लॉकडाउन के बढ़ने की बात को किया खारिज

अब तक भारत सरकार ने लॉकडाउन को आगे बढ़ाए जाने की रिपोर्ट्स को खारिज किया है। हालांकि भारत सरकार लॉकडाउन इस प्रक्रिया को जानकार कुछ अधिकारियों ने कहा की, ऐसे क्षेत्र जहां Covid -19 मरीजों की खासी संख्या होगी उन्हें लॉकडाउन के बाद हॉट जोन्स की तरह चिह्नित किया जा सकता है।भारत सरकार ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग तरह के उपाय काम में लाए जा सकते हैं। इस तरह के वैज्ञानिक मॉडल हॉट जोन जैसी स्थिति को काबू रखने में कारगर सकते हैं। हालांकि ऐसे मामलों में लॉकडाउन की अवधि कितनी रहनी चाहिए ये स्थानीय डेटा के हिसाब से अलग अलग हो सकती है।
Image Source:- foreignpolicy.com

Share and Enjoy !

0Shares
0 0 0

Pin It on Pinterest