March 29, 2020

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Corona Virus – क्या मिल गया है चीन को इस बीमारी का इलाज़ ? जानिए इससे जुड़ी हर ख़बर

चीन (China) के अखबार चाइना डेली ने Corona Virus का इलाज ढूंढ़ लेने के दावे को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के बाद उम्मीद बंधी है कि शायद अब इस लाइलाज बीमारी का इलाज मुमकिन है।

चीन (China) में Corona virus का कहर कम नहीं हुआ है। इस वायरस की चपेट में आकर मरने वालों का आंकड़ा डेढ़ हजार के पार कर गया है। कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आ रही हैं। पूरी दुनिया इस बीमारी के बढ़ते कहर से चिंतित है। चीन की शी जिनपिंग की सरकार पर खतरा पैदा हो गया है। शी जिनपिंग के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच एक खबर ये आ रही है कि चीन ने कोरोना वायरस का इलाज ढूंढ़ लिया है। दावा किया जा रहा है चीन ने इस बीमारी के पहली बार दिसंबर के पहले हफ्ते में पता चलने के ढाई महीने बाद Corona Virus का इलाज ढूंढ़ लिया गया है। बताया जा रहा है कि Corona virus से संक्रमित मरीज, जो ठीक हो चुके हैं, उनके जरिए करोना वायरस से संक्रमित दूसरे मरीजों का इलाज संभव है।

ठीक हो चुके रोगियों का प्लाज्मा इलाज में मददगार

चीन की सरकारी मेडिकल कंपनी नेशनल बॉयोटेक ग्रुप ने दावा किया है कि ब्लड प्लाज्मा के जरिए कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज को ठीक किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि 8 फरवरी के बाद कोरोना वायरस के करीब 10 गंभीर मरीजों का इलाज इस पद्धति से किया गया है और वो सारे मरीज ठीक हो गए हैं।इस रिजल्ट के बाद अब कंपनी का भरोसा बढ़ा है और इसे कोरोना वायरस के संक्रमण का भरोसेमंद इलाज माना जा रहा है।

चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण को खत्म करने के लिए इलाज की इस पद्धति में उस व्यक्ति का ब्लड प्लाज्मा लिया जाता है, जो पहले कोरोना वायरस के संक्रमण में आ चुका हो और ठीक हो गया हो। नेशनल बॉयोटिक ग्रुप कंपनी का कहना है कि संक्रमण के बाद ठीक हुए व्यक्ति के ब्लड में हाई एंटीबॉडी पाई जाती है।ऐसे लोगों के ब्लड प्लाज्मा से बीमार व्यक्तियों का इलाज संभव है।

कंपनी का दावा है कि इस ट्रीटमेंट का असर 24 घंटे में ही दिखने लगता है। जिन मरीजों को उन्होंने ब्लड प्लाज्मा ट्रीटमेंट दिया उनका बुखार और बीमारी के बाकी लक्षण 24 घंटे के भीतर कम होने लगे। चीन अब इस ट्रीटमेंट को लेकर लगातार प्रयोग कर रहा है। इसको लेकर क्लीनिकल ट्रॉयल चल रहे हैं। कम से कम 77 रजिस्टर्ड मरीजों पर इसका ट्रायल जारी है।

1776 लोगों की अब तक हो चुकी है मौत

कोरोना वायरस चीन में महामारी की तरह उभरकर आया है। चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर में सी-फूड मार्केट से फैली इस महामारी ने चीन में देखते-देखते 1800 से ज्यादा लोगों की जिंदगियां निगल ली हैं। चीन में 11,298 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं , वहीं 11,298 लोगों की हालत अभी गंभीर बनी हुई है। 47,117 लोगों की हालत स्थिर है, वहीं 11,145 लोग इस बीमारी से ठीक हो गए हैं। चीन में अभी 58,415 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

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इलाज के लिए जमा किए जा रहे हैं ब्लड प्लाज्मा

चीन की नेशनल बॉयोटेक ग्रुप कंपनी अब ऐसे लोगों के ब्लड प्लाज्मा इकट्ठा कर रही है, जो पहले कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार थे और अब ठीक हो चुके हैं। ऐसे लोगों के ब्लड प्लाज्मा में हाई एंटीबॉडी होती है। अब ऐसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सामने आने के लिए कहा जा रहा है जो संक्रमण से निकलकर बाहर आए हैं। उन्हें अपना ब्लड डोनेट करने के लिए उत्साहित किया जा रहा है।

एक एक्सपर्ट ने इलाज की इस पद्धति को लेकर कहा है कि नोवल कोरोना वायरस के जो मरीज रिकवर हुए हैं, उनके शरीर में इतना ताकतवर एंटी बॉडी पाया गया है, जो वायरस को मार सकता है।

अभी तक कोरोना वायरस को लेकर वैक्सीन की खोज नहीं हुई है। इसको लेकर कोई दवा भी नहीं बनी है। इसलिए ऐसे में ब्लड प्लाज्मा वाली पद्धति कोरोना वायरस के इलाज में सबसे कारगर है। इससे वायरस से संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा कम होगा।

चीन की नेशनल बॉयोटेक कंपनी ऐसे लोगों से रक्तदान की अपील कर रही है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए हों। इस बारे में स्टेटमेंट जारी किया गया है। चीन की नेशनल हेल्थ कमीशन ने प्लाज्मा ट्रीटमेंट को गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज की ट्रीटमेंट गाइडलाइन में शामिल कर लिया है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन(WHO) का इस पर बयान

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन(WHO) ने कहा है कि प्रयोग के हिसाब से प्लाज्मा का इस्तेमाल ठीक है, लेकिन इसके लिए पेशेंट की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होनी चाहिए।डॉक्टरों के सामने पेशेंट की रोग प्रतिरोधक बढ़ाने की भी चुनौती है।

ठीक हुए लोगों के कलेक्टेड प्लाज्मा लोगों के इलाज के लिए बेहतर दवा बनकर उभरा है। जो लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं, उनके इलाज में मदद मिल रही है।

WHO के हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम के हेड डॉक्टर माइक रेयान ने इस बात की जानकारी जेनेवा में दी। माइक रेयान ने कहा कि इस दिशा में काम किया जाना चाहिए। डॉक्टर माइक का मानना है कि हाइपरिम्यून ग्लोब्युलिन रोगियों में एंटीबॉडी को बेहतर बनाता है, जो रोगियों को बेहतर करता है।

इसका इस्तेमाल सही वक्त पर किया जाना चाहिए। यह वायरस को खासा नुकसान पहुंचाता है और इससे मरीज का प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर होता है और वह कोरोना वायरस से लड़ने में बेहतर होता है। इसे सही वक्त पर किया जाना चाहिए, और यह हर बार सफल हो यह जरूरी नहीं है।

Image Source :-https://www.currentnewsdainik.com/wp-content/uploads/2020/02/CORONA.jpg

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