March 30, 2020

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तब्बू की जबरदस्त परफॉरमेंस वाली फ़िल्में!

तब्बू-की-फ़िल्में!

परिचय:

तब्बस्सुम फातिमा हाश्मी(तब्बू)  का जन्म जमाल हाशमी और रिजवाना के साथ हैदराबादी मुस्लिम परिवार में हुआ था| उसके माता पिता ने जल्द ही तलाक दे दिया था| उनकी माँ एक स्कूल टीचर थी,और उनके नाना सेवा निवृत प्रोफेसर थे,जो स्कूल चलाते थे|

तब्बू 1983 में मुंबई चली गई और दो साल तक “St. xaviers college ” से पढ़ाई की| वे शबाना आज़मि ,तन्वी आज़मी और बाबा आज़मी की भतीजी और एक्ट्रेस फराह नाज़ की छोटी बेहेन है | वे तेलगु, हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, मराठी, स्पेनिश, तमिल, मलयलम, फ्रेंच में भी बोल लेती है| आज हम आपको बताने जा रहे है तब्बू की कुछ ज़बरदस्त फिल्मों के बारे में |

करियर:

तब्बू की 1980 की एक और ज़बरदस्त फिल्मों में ”बाजार” में एक छोटा सा रोल किया था| बाद में 1985 में  14  साल की उम्र में फिल्म “हम नोजवान”में उन्होंने देव आनंद की बेटी की भूमिका निभाई| एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली भूमिका वैंकटेश के साथ सेह -अभिनीत तेलुगु फिल्म कुली नंबर.1  में थी|

एक प्रमुख महिला क रूप में तब्बू की हिंदी में पहली फिल्म पहला पहला प्यार थी, जिस पर किसी का ध्यान नहीं था| वह अजय देवगन के  साथ विजयपथ , 1994 में अपने भूमिका के साथ प्रमुखता में आयी , जिसके लिए उन्हें  फिल्मफेयर  बेस्ट फीमेल डेब्यू अवार्ड मिला| इसके बाद कई फिल्मे आयी जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया| हालाँकि, इस अवधि में  वह एक सफल फिल्म “हकीकत” 1995  में दिखाई दी|

1996 में तब्बू की “आठ” रिलीज़ हुई| दो फिल्म में “साजन चले ससुराल” और “जीत” हिट रही, दोनों उस साल की शीर्ष पांच फिल्मो में शामिल थे| उनकी अन्य महत्वपूर्ण फिल्म “माचिस” को समीक्षकों द्वारा सराहा गया| वह अपने परफॉरमेंस क लिए बेस्ट एक्ट्रेस का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने के  लिए  आगे बड़ी| उसी साल साउथ में उनकी प्रमुख blockbuster  फिल्मे देखी गयी| उन्होंने नागार्जुन के साथ तेलुगु ब्लॉकबस्टर “नीने पल्लदत्ता” में अभिनय किया| एक ऐसी फिल्म जिसने तेलुगु में फर्स्ट फीचर फिल्म का “राष्ट्र्य फिल्म पुरस्कार जीता”|

फिल्में:

1997 में रिलीज़ होने वाली एक और ज़बरदस्त फिल्म थी “बॉर्डर”| यह फिल्म 1997 के भारत-पाक युद्ध के दौरान लोंगेवाला की लड़ाई से जुड़ी जीवन की सच्ची घटनाओं के बारे में थी। उन्होनें इस फिल्म में सन्नी देवल की पत्नी की भूमिका निभाई थी। उनकी भूमिका इस फिल्म में छोटी थी, लेकिन यह फिल्म 1997 की सबसे बड़ी हिट बनी| उसी वर्ष, उन्होंने समीक्षकों द्वारा सराही गयी फिल्म विरासत में भी भूमिका निभाई. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही; तब्बू को अपने अभिनय के लिए फिल्मफेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला.

1999 में उन्होंने दो सफल बहु-अभिनीत फिल्मों, बीवी नंबर 1 एवं हम साथ साथ हैं, में अभिनय किया।”Hum Saath-Saath हैं” , ” We Stand United ” दोनों फ़िल्में उस वर्ष की क्रमशः पहली और दूसरी सबसे बड़ी हिट फ़िल्में रहीं|

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तब्बू, अस्तित्व में सचिन खेडेकर के साथ अदिति के रूप में सन् 2000 में, अभिनेत्री ने” हेराफेरी “और “अस्तित्व” में अभिनय किया। इनमें से पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही, जबकि दूसरी समीक्षकों द्वारा सराही गयी। उन्हें अस्तित्व के लिए, सर्वश्रेष्ठ अभिनय का अपना तीसरा फिल्म फेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला|

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – दूसरा राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड जीता:

2001 में उन्हें मधुर भंडारकर निर्देशित फिल्म “चांदनी बार” में देखा गया। एक बार-डांसर के उनके चित्रण को एक सिरे से सभी ने सराहा एवं अपने अभिनय के लिए उन्होनें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड जीता। समीक्षक तरण आदर्श के शब्दों में, “चांदनी बार”  पूरी तरह से तब्बू की फिल्म है और इसमें कोई दो राय नहीं | उनका अभिनय सबसे अधिक अंकों एवं सभी अवॉर्डों का हक़दार है।

उनका काम दोषरहित है एवं उनके चरित्र का जो असर दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग़ पर पड़ता है वह उनके चरित्र रूपायन की क्षमता के कारण ही है। एक दूसरे समीक्षक के अनुसार ‘अगर कोई अभिनेत्री पूरी फिल्म को अपने कन्धों पर उठा सकती है, तो वह है तब्बू. हमेशा की तरह वो अपने किरदार में निखर उठती हैं।

2003 में तब्बू ने विलियम शेक्सपियर की “मैकबेथ” पर आधारित एक फिल्म में अभिनय किया। इसमें इस अभिनेत्री ने लेडी मैकबेथ के चरित्र पर आधारित ‘निम्मी’ का किरदार निभाया। मक़बूल नाम की यह फिल्म विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित थी एवं इसे 2003 में टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। यूं तो मक़बूल बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन इसे भरपूर प्रशंसा मिली। इसमें तब्बू के अभिनय को बहुत सराहना मिली। समीक्षक रॉनी अहलुवालिया के अनुसार ‘तब्बू एक स्याह किरदार में भी चमकती हैं।

खलनायिका का किरदार:

बॉलीवुड की सबसे बहुमुखी प्रतिभासंपन्न अभिनेत्री खलनायिका का किरदार ऐसे निभाती हैं, मानो वह उनके स्वभाव का ही हिस्सा हो। वह खतरनाक और सम्मोहक है, पर अपने चेहरे पर एक मासूम भाव रखती है, जिससे वह अपने चरित्र में कहीं अधिक घिनौनी बन जाती हैं। उनका ताने मारने का तरीका उनके चरित्र के हिसाब से बिलकुल सटीक है। उनकी क्रमिक विक्षिप्तता ह्रदय-विदारक है एवं अपने आवेग का उनका अंतिम विस्फोट निस्संदेह फिल्म की विशेषता है। एक अन्य समीक्षक ने कहा, “तब्बू एक जटिल किरदार में अद्भुत नज़र आयीं. इस फिल्म में उनका प्रदर्शन अवॉर्ड के लायक है। चांदनी बार के बाद यह ऐसा दूसरा किरदार है, जिसके लिए उन्हें लम्बे समय तक याद किया जायेगा|

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वे फ़ना (2006) में आमिर खान और काजोल के साथ सहायक भूमिका में थीं। यह फिल्म उस वर्ष की चौथी सबसे बड़ी हिट बनी सन् 2007 में, तब्बू ने अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म, मीरा नायर निर्देशित ‘द नेमसेक ‘ में अभिनय किया। यह फिल्म विदेशों में बड़ी हिट हुई| उन्होंने चीनी कम में भी अभिनय किया, जिसमें उन्होंनें एक 34 साल की महिला की भूमिका निभाई जिसे, अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत, एक 64 वर्षीय आदमी से प्यार हो जाता है।

इस फिल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं। तरण आदर्श ने कहा ‘तब्बू अपने दुर्जेय सह-अभिनेता की हावी हो जाने लायक उपस्थिति के बावजूद अपनी पहचान बना लेती हैं। वे उत्कृष्ट हैं। हालांकि यह फिल्म देश के भीतर खूब नहीं चली, लेकिन इसने विदेशों में, ख़ास तौर पर ब्रिटेन और अमेरिका में, अच्छा प्रदर्शन किया।

“फना” (2006) और “जय हो” (2014) के साथ साथ ”हैदर” और अन्य कई अलग अलग किरदार की भी  भूमिका निभाई| इसके साथ ही (2015) में दृश्यम और 2017  में गोलमाल में अलग किरदार में दिखी|

” मैं वही फ़िल्में करती हूं, जो मुझे भावुक बना दे ”

अपनी फिल्मों एवं भूमिकाओं के मामले में काफी चुनिन्दा मानी जाने वाली इस अभिनेत्री का कहना है कि ‘मैं वही फ़िल्में करती हूं, जो मुझे भावुक बना दे एवं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि फिल्म की यूनिट एवं निर्देशक मुझे प्रभावित करने चाहिए।

Image Source : timesofindia.indiatimes.com

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