April 1, 2020

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निर्भया केस : चारो दोषियों में से अभी तक किसी ने क्यों नहीं बताई अपनी अंतिम इच्छा-

निर्भया केस

निर्भया केस में से तीन ने हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाकर कर अपनी ”गैरक़ानूनी फांसी की सजा” रोकने का अनुरोध करते हए आरोप लगाया है कि ”दोषपूर्ण ”जाँच के जरिये उन्हें दोषी करार दिया गया|

दोषियों ने अब तक अपनी अंतिम इच्छा नहीं बताई है, चारों दोषियों को 20 मार्च को फांसी होनी है| तिहाड़ जेल के सूत्रों के मुताबिक हम 4 दोषियों की फांसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं|मंगलवार शाम को फांसी देने वाला जल्लाद पवन तिहाड़ जेल पहुंचेगा|

निर्भया केस के दोषी क्यों नहीं बता रहे अपनी अंतिम इच्छा ?

जल्लाद के आने के बाद एक बार फिर से 4 डमी फांसी दी जाएंगी| 18 या 19 मार्च को सभी दोषियों की मेडिकल जांच करवाई जाएगी,दोषियों से उनकी आखिरी इच्छा यानि संपत्ति बगैरा किसी के नाम करनी हो ये पूछा गया है,लेकिन किसी ने अभी तक बताया नहीं है|19 साल की बॉक्सिंग खिलाड़ी के साथ कोच ने ट्रेन में किया यौन उत्पीड़न

अक्षय को छोड़ कर बाकी सभी के घरवालों से आखिरी मुलाकात कराई जा चुकी है सभी दोषियों को जेल नंबर 3 के कंडम सेल में अलग-अलग रखा गया है सभी की 24 घंटे निगरानी कि जा रही है और उनके व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है|

 

 

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दूसरी ओर चार दोषियों में से तीन ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाकर अपनी ‘‘गैरकानूनी फांसी की सजा” रोकने का अनुरोध करते हुए आरोप लगाया है

कि ‘‘दोषपूर्ण” जांच के जरिये उन्हें दोषी करार दिया गया और उन्हें प्रयोग का माध्यम (गिनी पिग) बनाया गया है, दोषी के वकील ए.पी. सिंह के माध्यम से दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि चारों दोषियों… विनय शर्मा, पवन कुमार गुप्ता, अक्षय सिंह और मुकेश सिंह ने अभी तक अपने सभी कानून उपचारो का उपयोग नहीं किया है|

20 मार्च को होगी चारो दोषियों को फांसी

याचिका में कहा गया है कि यह सूचित करना बहुत जरुरी है कि ”मौत कि सजा पाए इस दोषियों के कानूनी उपचार,मुक़दमे भारत में विभिन्न अदालतों,संवैधानिक संस्थाओ के समक्ष लंबित है,लेकिन बेहद आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में केंद्रीय तिहाड़ जेल ने योजना तैयार कर ली है और उन्हें 20 मार्च को फांसी देने वाली है|”

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याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्भयाकेस मामले में दोषियों ने जांच के दौरान कई बार पॉलीग्राफ, लाइडिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग कराने का अनुरोध किया था,लेकिन ऐसे सभी अनुरोधों को बिना किसी तर्क के खारिज कर दिया गया | याचिका में आईसीजे से अनुरोध किया गया है कि वह मामले के एकमात्र चश्मदीद, पीड़िता के मित्र, की गवाही झूठ होने की संभावनाओं की ‘‘तत्काल जांच करें|”

उसमें दावा किया गया है कि दोषियों के साथ ‘गिनी पिग’ की भांती व्यवहार किया गया और उन्हें इस मामले में झूठ फंसाया गया है,आईसीजे से अनुरोध है कि वह मामले के तत्काल जांच का आदेश दे|

 

Image Source ;-www.currentnewsdainik.com

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