April 1, 2020

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निर्भया के गुनहगारो की फ़ासी की तारीख हुई फाइनल: 20 March

निर्भया के गुनहगारो की फ़ासी की तारीख हुई फाइनल: 20 March

भारत के इतिहास में  रहेगा 16 दिसंबर 2012  एक काली रात जिसने न केवल देशवासिओ को शर्मसारकिया पर दुनिया और इंसानियत को मिट्टी में मिला दिया।

जब एक 23 साल की लड़की अपने दोस्त के साथ मूवी देखकर घर लौट रही थी,जिसके लिए वो मुनिरका (south delhi)के लिए एक प्राइवेट बस में बैठे,हलाकि उन्होंने ऑटो-रिक्षा का भी इंतज़ार किया,पर कुछ न मिलने पर,जैसे ही एक प्राइवेट बस वह से गुजरी तो उसमे बैठे कुछ लोगो ने उनसे बस में बैठने के लिए कहा,देर रात का समय देखते हुए दोनों उसमे बैठे गए,उस बीएस में कुल 6 युवक थे जिसमे ड्राइवर भी शामिल था,अचानक से उनमे से एक युवक से बस का दरवाजा बंद कर दिया।

यह देखते हुए निर्भया के दोस्त ने आवाज उठाते हुए बोला,की ये क्यों बंद कर रहे हो,उसी समय उनमे से कुछ लड़को ने निभाया के दोस्त को मरना शुरू कर दिया,और रोड से बुरी तरीके से पीटा। और पीछे वाली सीट पर फेक दिया।

 

वो 6 युवको में से एक ड्राइवर भी था।जिन्होंने निर्भया को जबरदस्ती खींच कर पीछे ले गए,जहाँ उसका बलात्कार किया गया। निर्भया के दोस्त ने बताया था की उसने बस का कांच तोड़ने की भी कोशिश की थी,लकिन बस का कांच नहीं टूट पाया,साथ ही उनलोगो ने निभाया के दोस्त को बहुत पीटा। दोस्त ने यह भी बताया की जब वो बेहोशी की हालत मई था तो वो लोग बाते करते हुए बोल रहे थे की,(मर गई है लड़की अब इन्हे बहार फेक देते है)और खा की वो लोग ये चाहते थे की उन दोनों पर बस चढ़ा कर मर दें और किसी को पता ही न चले की उस रात को क्या हुआ था।

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सिंगापुर में ली आखिरी साँसे

15  दिन बाद जब निर्भया की हालत बहुत गंभीरथी तो इमरजेंसी में उसी सिंगापुर के अस्पता में भेजा गया,जहाँ उसने अपनी आखिरी साँसे लीं।उसी वेंटिलेटर पर रखा गया।

फिर उन् दोनों को बस से बहार फेक दिया गया,और जहाँ उन्हें फेका गया था,वो दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के वसंत विहार के नजदीक का इलाका था। दोस्त ने ये भी बताया की जिस रोड पर हमे फेका गया वहाँ से बहुत गाड़ी ग़ुज़री मगर कोई भी मदद के लिए नहीं आया।

फिर तभी एक बाइक वाला आया जिसने हमें देखकर अपने ऑफिस कॉल करके गाड़ी बुलाई और हमें सफदरजंग अस्पताल लेजाया गया। उस हादसे के बाद पूरी दिल्ली में कोहराम मच गया था। निर्भया की हालत संभल नहीं रही थी, इसलिए सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने रात के करीब सवा दो बजे वहां दम तोड़ दिया था।

निर्भया का नाम कैसे पढ़ा

इस दुष्कर्म के बाद,उसके न्याय के लिए पूरी दिल्ली और साथ ही बहुत से राज्य में कैंडल मार्च निकला गया।और रपे law के अनुसार किसी भी विक्टिम का नाम नहीं बताया जाता,इसी लिए दिल्ली की जनता और मीडिया ने मिलकर उसको निर्भया नाम दिया।साथ ही निर्भया के माता-पिता उसके इंसाफ के लिए लड़ रहे है,तो इंतज़ार अब  है उन् दोषियों के फांसी का ।

निर्भया के नाम का मतलब

मतलब है,निडर(fearless)एक जोश के साथ एक हिम्मत देते हुए। विक्टिम का नाम निर्भया रख दिया।इस केस के बाद दिल्ली में बहुत बदलव आया और महिला सुरक्षा का भी इंतज़ाम किया गया।घटना के बाद राजधानी के कई अंधेरे वाले जगह में काम किया गया।जहां स्ट्रीट लाइट या बल्ब खराब पड़े होने के कारण बदमाश महिलाओं को शिकार बनाने की कोशिश करते हैं। पर अब महिला सुरक्षा का 181 कॉल no भी बना। और काफी रूल्स बनाये गए।

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निर्भया के दोषियों के साथ क्या हुआ?

निर्भया रपे कांड में ड्राइवर सहित 6 दोषी थे, जिसमे की एक ड्राइवर था और एक नाबालिक भी था,मार्च, 11  2013 तिहार जेल में दोषी ड्राइवर ने आत्महत्या कर ली थी।वही जो नाबालिक आरोपी था उसको जुवेलाइल जस्टिस के तहत सजा दी गई थी। उसी ने निर्भया और उसके दोस्त को आवाज़ लगाकर बस में बैठने को कहा,जब की वो स्कूल बस थी।

जानकारी से पता लगा था की,नाबालिक आरोपी 11 साल की उम्र में घर से भागा  हुआ था। बाकी 4 दोषियों को फांसी के लिए डेट अब तक फाइनल नहीं हुई थी,20 दिसंबर 2015 को अदालत ने जमानत पर आरोपी को रिहा कर दिया गया।उसको कड़ी सुरक्षा में भी रखा गया। निर्भया कांड के बाद कानून तक में बदलाव किया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बालिग दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 10 सितंबर, 2013 को चारों बालिग आरोपियों को दोषी करार दिया और 13 सितंबर 2013 को उन्हें मौत की सजा सुनाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जनवरी 2014 को फैसला सुरक्षित रखा और 13 मार्च 2014 को निचली अदालत द्वारा चारों बालिग आरोपियों को सुनाई गई मौत की सजा पर मुहर लगा दी।

 

हलाकि 2015 में आरोपियों को सजा मिलने वाली थी।पर आरोपियों न

सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2017 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को फैसला दिया, जिसका पूरे देश को इंतजार था।

सुप्रीम कोर्ट ने भी चारों बालिग आरोपियों की मौत की सजा को कायम रखा। जबकि डेट 3 मार्च भी दी गई थी,पर किसी वजह से डेट आगे हो गयी थी। 20  मार्च 5:30 बजे रखा गया। और अब इंतज़ार है इन्साफ का।

Image Source:- www.youtube.com

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