May 28, 2020

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हमारो राजस्थान : जानिये स्थापना दिवस पर जुड़ीं कुछ अहम और रोचक बातें..

हमारो राजस्थान

हमारो राजस्थान दो शब्दों से मिलकर बना है ‘राज’ और ‘स्थान’। यानी स्थानों या जगहों का राजा। यह गुजरात,मध्यप्रदेश,उत्तर प्रदेश,हरियाणा और पंजाब से घिरा हुआ है। 30 मार्च, 1949 को राजस्थान का गठन हुआ था। आइए आज स्थापना दिवस पर राजस्थान के बारे में काम की बातें जानते हैं|

1857 के विद्रोह के बाद महात्मा गांधी के नेतृत्व में लोग एकजुट हुए और स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया। आजादी के बाद जब रियासतों का विलय होना शुरू हुआ तो बड़ी रियासतों जैसे बिकानेर, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर को मिलाकर ग्रेटर राजस्थान बना।

1958 में आधिकारिक तौर पर मौजूदा हमारो राजस्थान राज्य वुजूद में आया। उस समय अजमेर,आबू रोड तालुका और सुनल तप्पा रियासतों ने भी राजस्थान में विलय किया। राजस्थान दिवस राजस्थान का स्थापना दिवस भी कहा जाता है।

यहां के बारे में लोग सोचते हैं कि वहां सिर्फ रेगिस्तान ही रेगिस्तान होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। कुछ हिस्से में आपको रेगिस्तान बिल्कुल नहीं दिखेगा। वहां आपको हरियाली भी दिखेगी।

राजस्थान के लगभग बड़े शहरों का किसी न किसी खास रंग से संबंध है जैसे जयपुर का गुलाबी,उदयपुर का सफेद,जोधपुर का नीले रंग और झलावर का बैंगनी रंग से इन जगहों पर लगभग सभी खास स्मारकों और स्थानों को खास रंगों से रंगा गया है। यही वजह है कि जयपुर को गुलाबी शहर,उदयपुर को वाइट सिटी भी बोलते हैं।

राजस्थान

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राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में हुआ। इसकी शुरुआत 18 अप्रैल 1948 को अलवर,भरतपुर,धौलपुर और करौली रियासतों के विलय से हुई।

विभिन्न चरणों में रियासतें जुड़ती गईं तथा अंत में 30 मार्च 1949 को जोधपुर,जयपुर,जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से “वृहत्तर राजस्थान संघ” बना और इसे ही राजस्थान स्थापना दिवस कहा जाता है। इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की सक्रिय भूमिका रही

30 मार्च, 1949 में जोधपुर,जयपुर,जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था।

यहां का अस्तित्व प्रागैतिहासिक काल से मिलता है। समय-समय पर यहां चौहान,मेवाड़,गहलोत वंशों का राज रहा है। मेवाड़,मारवाड़,जयपुर, बुंदी,कोटा,भरतपुर और अलवर बड़ी रियासतें हुआ करती थीं।

इन सभी रियासतों ने ब्रिटिश शासन की अधीनता स्वीकार कर ली थी। इससे राजाओं ने अपने लिए तो रियायतें हासिल कर लीं लेकिन लोगों के बीच असंतोष रहा।

इस दिन राजस्थान के लोगों की वीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बलिदान को नमन किया जाता है।यहां की लोक कलाएं,समृद्ध संस्कृति,महल,व्यंजन आदि एक विशिष्ट पहचान रखते हैं।

इस दिन कई उत्सव और आयोजन होते हैं जिनमें राजस्थान की अनूठी संस्कृति का दर्शन होता हैं।पीएम मोदी ने सामाजिक कल्याण संगठन के सदस्यों और राजनय‍िक मिशनों के प्रमुखों के साथ बात की

इसे पहले राजपूताना के नाम से जाना जाता था तथा कुल 22 रियासतों को मिलाकर यह राज्य बना तथा इसका नाम “राजस्थान” किया गया जिसका शाब्दिक अर्थ है “राजाओं का स्थान” क्योंकि स्वतंत्रता से पूर्व यहां कई राजा-महाराजाओं ने राज किया।

ऐसा माना जाता है कि अरावली पर्वत श्रृंखला बनने की वजह से सरस्वती नदी थार रेगिस्तान के नीचे ही गुम हो गई थी। अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है। यह हिमालय से भी पुरानी है।

क्षेत्रफल के मामले में राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है। राज्य के बड़े हिस्से
में थार रेगिस्तान है जिसको ग्रेट इंडियन डेजर्ट के नाम से भी जाना जाता है।  यहां बालू के टीलों,रेगिस्तान और चट्टानों की धरती है।

जयपुर यहां की राजधानी है। जयपुर यहां का सबसे बड़ा शहर भी है। राजस्थान भव्य महलों,किलों,रंगों और उत्सवों के लिए प्रसिद्ध है। इससे जुड़ीं कुछ अहम और रोचक बातें नीचे दी गई हैं|

थार रेगिस्तान

थार रेगिस्तान का ज्यादातर हिस्सा राजस्थान में पड़ता है। इसका कुछ हिस्सा हरियाणा,पंजाब और गुजरात के कच्छ के रण तक पाया जाता है। थार रेगिस्तान पाकिस्तान के सिंध प्रांत और पाकिस्तानी पंजाब के कुछ हिस्से तक भी फैला हुआ है। पर्यटकों के लिए यहां कैमल सफारी काफी पसंद है।

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हमारो राजस्थान के प्रमुख स्थान

उदयपुर,नागौड़,माउंट आबू,कोटा,जोधपुर,झलावर,जयसलमेड़,जयपुर,बिकानेर और अजमेर यहां की प्रसिद्ध जगहें हैं जो यहां स्थित महलों,मंदिरों और दरगाह के लिए प्रसिद्ध हैं।

Image Source:-www.currentnewsdainik.com

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