June 4, 2020

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भारतीय वायुसेना की 87 वीं जयंती, शीर्ष विमान समारोह में भाग लेंगे

भारतीय वायुसेना की 87 वीं जयंती, शीर्ष विमान समारोह में भाग लेंगे

आज का दिन हमारे देश के लिए बहुत खास है, जी हाँ आज का दिन दशहरा के लिए खास तो है ही आज का दिन इस लिए भी खास है क्योंकि आज के दिन हमारे वायुसेना की स्थापना हुई थी| भारतीय वायु सेना के लिए आज एक बड़ा दिन है|

वायुसेना की 87वीं जयंती के साथ-साथ भारत अपने नए मल्टीरोल फाइटर जेट राफेल को वायु सेना में फ्रांस के मेरिग्नैक के एक समारोह में हैंडओवर करेगा| जिसके बाद फ्रांस में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांसीसी फर्म डसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाए गए पहले राफेल की डिलीवरी लेंगे|

यहीं नहीं अपनी 87वी जयंती पर वायुसेना ने विमानों, हेलीकॉप्टरों और फाइटर जेट्स के साथ दिल्ली के पास गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर भव्य फ्लाईपास्ट करने की योजना बनाई है| इस समारोह ने एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी शामिल होंगे|

आइए जानते है कौन-कौन से विमान शामिल होंगे

चिनूक हेलीकाप्टर

अपाचे अटैक हेलीकाप्टर

हरक्यूलिस परिवहन विमान

सी-17 ग्लोबमास्टर III

जैगवार

मिग-21 बाइसन

मिग 29

मिराज 2000

सुखोई-30 एमकेआई

LCA तेजस

इन सारे विमानों और हेलीकॉप्टरों में कुछ ऐसे भी हेलीकाप्टर शामिल है जिन्हे पहली बार किसी फ्लाईपास्ट में शामिल किया जाएगा| जैसे चिनूक हेलीकाप्टर और अपाचे अटैक हेलीकाप्टर, उन्हें कुछ दिनों पहले है अमरीका से लिया गया है| फ्लाईपास्ट के अंत में रूसी मूल के सुखोई-30 एमकेआई एक शानदार युद्धाभ्यास करेंगे|

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चिनूक हेलीकाप्टर

यह विशाल हेलिकॉप्टर 9.6 टन तक कार्गो ले जा सकता है| इसमें भारी मशीनरी, आर्टिलरी बंदूकें और हाई अल्टीट्यूड वाले लाइट आर्मर्ड वीकल्स शामिल हैं| पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है| चिनूक काफी गतिशील है और इसे घनी घाटियों में भी आसानी से आ-जा सकता है| सैन्य पोतों की आवाजाही से लेकर यह डिजास्ट रिलीफ ऑपरेशंस जैसे मिशन में भी अपना काम अच्छी तरह करता है|

यह आइकॉनिक ट्विन रोटोर चॉपर युद्ध में अपनी ज़रूरत को कई बार साबित कर चुका है| चिनूक हेलिकॉप्टर्स को वियतनाम से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के युद्ध में इस्तेमाल किया जा चुका है| सबसे पहले चिनूक हेलिकॉप्टर को 1962 में उड़ाया गया था और तब से अब तक इसकी मशीन में बड़े अपग्रेड हो चुके हैं| फिलहाल यह दुनिया के सबसे भारी लिफ्ट चौपर में से एक है|

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चिनूक के भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढे़गी बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट को बनाने में भी इसका अहम योगदान रहेगा है| नॉर्थ ईस्ट में कई रोड प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं और उन्हें पूरा करने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन लंबे समय से एक हेवी लिफ्ट चॉपर का इंतजार कर रहा था जो इन घनी घाटियों में सामग्री और ज़रूरी मशीनों की आवाजाही कर सके|

अपाचे अटैक हेलीकाप्टर

बोइंग द्वारा निर्मित, अपाचे एएच-64 ई हमले हेलीकाप्टरों को “टैंक बस्टर्स” के रूप में भी जाना जाता है| अपाचे हैलफायर मिसाइलों और रॉकेटों से लैस हैं| प्रत्येक हेलीकॉप्टर में आठ ऐसी मिसाइलों को ले जाने की क्षमता है| इसमें एक कैनन बंदूक भी है जो एक बार में 1, 200 राउंड फायर कर सकती है, जिसके साथ दो मिसाइल पॉड है जिनमें 19 मिसाइल ले जा सकते हैं| इसे इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी वायु सेना के लिए उड़ान भरते हुए देखा गया है|

Image Source : Google

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