March 30, 2020

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Ayushmann Khurana एक बार फिर हाज़िर है अपनी नई फिल्म के साथ

Ayushmann Khurana

Ayushmann Khurana बॉलीवुड के उन सितारों में से है जिनका नाम उनके काम से आज दुनियाभर में चलता है आयुष्मान की हर फिल्म किसी न किसी सामाजिक चलन को चैलेंज करती ही नज़र आती है ।

तो लीजिये एक बार फिर हाज़िर है आयुष्मान अपनी फिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान के साथ ये फिल्म Ayushmann Khuran और भूमि पेडनेकर की 2017 में आई फिल्म शुभ मंगल सावधान का ही सीक्वेल है पर पिछली बार जहा अपनी फिल्म की स्टोरी से जहा Ayushmann khurana ने मर्दो की सेक्स समस्या को दर्शाया था तो इस बार वो लेकर आए एक और ऐसे ही टॉपिक को जिसके बारे में आज भी हम अपने घरो में बात करने से कतराते है ।

कोई माँ बाप ये सुन्ना तो दूर इसके बारे में सपने में भी नहीं सोचना चाहते की उनके बच्चे कभी इस तरह की बीमारी में पड़े| जी आपने सही सुना बीमारी आज भी इंडिया में होमोसेक्सुअलिटी को बीमारी ही माना जाता है तो इस बार समाज की इस सोच को चैलेंज करने लेकर आए है Ayushmann khurana अपनी ये नै फिल्म जो आज ही रिलीज़ हुई है तो चलिए आपको बताते है इस फिल्म की स्टोरी साथ ही ये भी की आख़िर क्यों देखनी चाहिए आपको ये फिल्म

क्या है फिल्म की कहानी

रोज हमें लड़ाई लड़नी पड़ती है जिंदगी में, पर जो लड़ाई परिवार के साथ होती है, वो सारी लड़ाई सबसे बड़ी और खतरनाक होती है। आनंद एल राय निर्मित और हितेश केवल्या निर्देशित ‘शुभ मंगल और ज्यादा सावधान’ का यह डायलॉग समलैंगिक कम्युनिटी की बेबसी और संघर्ष को बयान कर देता है।

वाकई आज भले कानून ने समलैंगिता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया हो, मगर समलैंगिक समुदाय को होमोफोबिया के रूप में अपने ही परिवारों से घृणा, तिरस्कार और रिजेक्शन सहना पड़ता है।

समाज के सोच पर सवाल करती है ये फिल्म

वाकई आज भले कानून ने समलैंगिता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया हो, मगर समलैंगिक समुदाय को होमोफोबिया के रूप में अपने ही परिवारों से घृणा, तिरस्कार और रिजेक्शन सहना पड़ता है।

फिल्म इस पॉइंट को साबित करने में सफल साबित होती है कि सिर्फ कानून बनाने से बात नहीं बनेगी, सामजिक तौर पर यह काउंसिलिंग होनी भी जरूरी है कि होमोसेक्शुलिटी कोई बीमारी नहीं बल्कि कुदरत है, प्रकृति है और उससे आप नफरत नहीं कर सक सकते।

कहानी की शुरुआत से ही साफ़ है की कार्तिक जिसका किरदार इस फिल्म में आपको Ayushmann Khurana निभाते दिखेंगे वो गे है और वह अमन त्रिपाठी (जितेंद्र कुमार) से प्यार करता है।

उनका असली संघर्ष तब शरू होता है, जब अमन की कजिन की शादी के दौरान अमन के पिता शंकर त्रिपाठी (गजराज राव) उन दोनों को ट्रेन में चुम्बन करते हुए देख लेते हैं। अमन के पिता अपने बेटे की होमोसेक्शुलिटी को समझ भी नहीं पाए थे कि शादी के दौरान दोनों के रिश्ते का सच सबके सामने आ जाता है। उसके बाद तो दोनों के प्यार में कई दीवारें खड़ी करने की कोशिश की जाती है।

अमन की माँ का किरदार अदा कर रही है नीना गुप्ता जो एक बार फिर अपने पिछले ऑन स्क्रीन पति के साथ नज़र आ रही है वो अमन को कहती है की इस बीमारी का इलाज संभव है। मां पंडित जी से कर्म-कांड करवा कर अमन का अंतिम संस्कार कर उसे नया जन्म देने की विधि भी करवाती है। और तो और पिता आत्महत्या की कोशिश और धमकी देकर अमन को शादी करने पर मजबूर भी कर देते हैं।

परिवार के साथ के महत्व को बताती हैं ये फिल्म

पिता और परिवार के लिए अमन शादी करने को राज़ी हो जाता है। मगर कार्तिक लगातार अमन को समझाता रहता है कि उसे अपने प्यार के लिए आगे आना होगा? क्या कार्तिक और अमन अपनी सेक्शुएलिटी के साथ परिवार की एक्सेप्टेंस हासिल कर पाते हैं? इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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लेकिन इतना तो तय है की फिल्म में आपको मनोरंजन मिलने के साथ ही ये फिल्म एक बेहद ही गंभीर और आज के दौर के यंगस्टर्स की ज़िंदगियों की उलझनों को बखूबी बया करती ये फिल्म बड़े ही मनोरंजक आज़ाद में अपनी कहानी कहती दिखेगी।

इंडिया जैसे देश में जहा देश के सुप्रीम कोर्ट ने जिस बात पर अपना न सिर्फ फैसला सुनाया हो बल्कि अपने उस फैसले में हुई देरी के लिए सारी गे कम्युनिटी से माफ़ी तक मांगी हो उसके बावजूद ये वो देश है जहा आज भी खुद को मॉर्डन कहने वाले लोग होमोसेक्सुअलिटी को एक खतरनाक बीमारी जैसा मानते हो वहा ऐसे मुद्दे पर फिल्म बनाना काफ़ी अहम् हो जाता है क्योंकि फिल्म एक ऐसा जरिया है जिसके माध्यम से एक ही बार में लगभग पूरे समाज को कोई बात समझाई जा सकती है|

Image Source:- https://www.currentnewsdainik.com/wp-content/uploads/2020/02/download-1-1.jpg

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