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समाजवादी पार्टी अपडेट: पिता से जबरदस्ती करके समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बने अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) और उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद जनाधार के मामले में हाशिए पर जा चुकी है। अखिलेश अपने नेताओं को ही अब महत्व नहीं देते हैं, जिनमें सपा के लोकसभा सांसद और पार्टी की मुस्लिम राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे आज़म खान का नाम सबसे ऊपर आता है। इसके चलते कांग्रेस समेत AIMIM प्रमुख ओवैसी आजम खान(Azam Khan) से नजदीकियां बढ़ाने लगे हैं। ऐसे में पार्टी के बड़ेम चे मुस्लिहरे को छिटकता देख सपा प्रमुख अखिलेश यादव घबरा गए हैं और अचानक उनके घर पहुंच गए जिससे प्रदेश के मुस्लिम समुदाय में सपा और आजम खान को लेकर गलत संदेश न जाए।

समाजवादी पार्टी को लेकर ये कहा जाता है कि उसकी पूरी राजनीति केवल मुस्लिम-यादव समीकरण के आधार पर ही होती है। इनमें से यदि एक भी बिगड़ता है तो पार्टी में दिक्कतें बढ़ जाती हैं। 2017 से लेकर 2019 के चुनावों में बीजेपी ने इन सारे समीकरणों को तोड़ भी दिया था। इसके चलते अखिलेश पहले ही काफी घबराए हुए हैं। ऐसे में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेताओं का आज़म खान(Azam Khan) को रिझाने की कोशिश करना अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) के लिए एक अन्य डर का विषय है।

इसके अलावा कांग्रेस भी आज़म के प्रति नर्म रुख दिखा रही है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम ने इसको लेकर कहा था, जब अखिलेश यादव आज़म खान के नहीं हुए तो मुस्लिमों के क्या होंगे? जो दिखाता है कि पार्टी आजम खान जैसे मुस्लिम चेहरे को पार्टी में लाने की कोशिश कर रही है, जिससे पार्टी को फायदा हो सके। अखिलेश पर लगातार आज़म खान के मुद्दे पर सभी विपक्षी पार्टियां खुलकर हमला बोल रही हैं जिसके चलते सपा के टीपू की मुसीबतें बढ़ रही हैं।आज़म खान के जरिए पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक में हो रही सेंधमारी को सपा अध्यक्ष ने भी अब गंभीरता से ले लिया है। इसको लेकर उन्होंने अपनी रणनीति तक बदल दी हैं। इससे पहले की बात और ज्यादा बिगड़ती अखिलेश ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करना शुरु कर दिया है। अखिलेश अचानक ही आज़म खान के पास रामपुर पहुंच गए। एक दिन पहले ही आजम़ खान, उनकी पत्नी फातिमा, उनके बेटे अब्दुला को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी थी, जिसके बाद अखिलेश अपना राजनीतिक हित साधने को उनके पास पहुंच गए हैं।

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ये वही अखिलेश यादव हैं, जो पिछले साल भर से आज़म खान से दूरी बनाए हुए हैं। आज़म पर जब लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों में योगी सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही थी, तो अन्य पार्टियों की तरह अखिलेश ने उनका सपोर्ट करने की बजाए उनसे दूरी बनाना ही बेहतर समझा। ऐसे में जब अखिलेश यादव पर कांग्रेस और ओवैसी ने हमला बोलते हुए उनसे सहानुभूति दिखाई तो अखिलेश को तुरंत अपना मुस्लिम वोट याद आ गया, और वो सीधा आज़म खान के घर पहुंच गए।

खास बात ये  है कि उन्होंने दिन भी ऐसा ही चुना, जब सुप्रीम कोर्ट से आज़म खान के परिवार को राहत मिल चुकी है, जो दिखाता है कि अखिलेश यादव के अंदर आज़म खान के छिटकने का डर बहुत ज्यादा है और उन्हें अब अपनी गलतियों का एहसास हो चुका है, और इसीलिए उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं उन्हें दोबारा आज़म खान के पास खींच लाईं हैं।

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