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भारत सरकार कोविड-19 महामारी के खिलाफ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर “संपूर्ण सरकार” दृष्टिकोण के माध्यम से लड़ाई का नेतृत्व कर रही है। विश्व के कई देशों ने वैश्विक कोविड-19 महामारी के खिलाफ इस सामूहिक लड़ाई में भारत सरकार की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। अमेरिका, जर्मनी, रूस, यूनाइटेड किंगडम जैसे कई देशों ने भारत को चिकित्सा उपकरण, दवाएं, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन इत्यादि उपलब्ध कराए हैं।

फास्ट ट्रैक आधार पर शीघ्र निकासी के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

भारतीय कस्टम कोविड संबंधित आयातों जैसे ऑक्सीजन और ऑक्सीजन से संबंधित उपकरणों सहित उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रति संवेदनशील है। आने वाले समय में सभी राज्यों को जल्द से जल्द कोविड संबंधित जरूरतें मुहैया कराने के लिए भारत सरकार बहुत तेजी से काम कर रही है। फास्ट ट्रैक आधार पर शीघ्र निकासी के लिए कई कदम उठाए गए हैं। तेजी से निकासी के अलावा सरकार ने निम्न कदम भी उठाए हैं:

  1. भारतीय कस्टम्स ने कोविड संबंधित सामानों पर बेसिक सीमा शुल्क और स्वास्थ्य उपकर को माफ कर दिया है।
  2. निशुल्क आयात के बाद राज्य सरकारों को मुफ्त में ऑक्सीजन दी जाती है। इसके बाद इन प्रमाणित सामानों पर आईजीएसटी को भी माफ कर दिया जाता है।
  3. इसके अलावा, सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के व्यक्तिगत उपयोग के लिए आईजीएसटी 28% से घटाकर 12% कर दिया गया है।

आवंटन के लिए बनाया गया एक सुव्यवस्थित तंत्र

चिकित्सा और अन्य राहत व सहायता सामग्री के वितरण के लिए भारत सरकार द्वारा प्राप्त आपूर्ति के आवंटन के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री के अपर सचिव की निगरानी में अनुदान, सहायता और दान के रूप में प्राप्त विदेशी राहत सामग्री के आवंटन के लिए एक सेल बनाया गया है। इस सेल ने 26 अप्रैल 2021 से काम करना शुरू कर दिया है। इस सेल के सदस्यों में शिक्षा मंत्रालय से प्रतिनियुक्ति पर एक संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय से अपर सचिव स्तर के दो अधिकारी, कस्टम्स से मुख्य आयुक्त, नागरिक उड्डयन मंत्रालय से आर्थिक सलाहकार और विभिन्न विभागों से कई अन्य प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में पूरे ऑपरेशन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन हुआ है। इस समिति में विदेश मंत्रालय, नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय के कई अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

ज्यादा प्रभावित राज्य हैं प्राथमिकता

चूंकि यह अनुदान सीमित मात्रा में है, इसलिए इसे ज्यादा प्रभावित राज्यों अर्थात सक्रिय मामलों की अधिक संख्या वाले राज्यों, जहां ऐसे उपकरण / दवाओं की आवश्यकता अधिक है, को आवंटित करके इसका बेहतर उपयोग किए जाने की योजना है। हर बार सहायता के रूप में मिले इस तरह के अनुदान को सभी राज्यों में वितरित करना वांछित परिणाम नहीं ला सकता। अस्पतालों में भर्ती होने वाले व्यक्तियों की संख्या और साथ ही भारत सरकार के संसाधनों से किए गए पूर्व वितरण को ध्यान में रखते हुए ज्यादा प्रभावित राज्यों की आवश्यकताओं पर भी विचार किया जाएगा। उपरोक्त मानदंडों के आधार पर 24 विभिन्न श्रेणियों के लगभग 40 लाख उपकरणों को विभिन्न राज्यों में 86 संस्थानों को वितरित किया गया है। इनमें ड्रग्स, ऑक्सीजन संबंधित उपकरण,पीपीई किट, मास्क आदि शामिल हैं।

अब तक इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भेजे जा चुके ये उपकरण
 
ये आवंटन समान वितरण और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर भार को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं। पहले कुछ दिनों में, राज्यों में एम्स तथा अन्य केंद्रीय संस्थानों के माध्यम से ये सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि जहां आवश्यकता सबसे अधिक है, वहां ये वस्तुएं जल्द से जल्द पहुंचे। इसके अलावा, दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में डीआरडीओ सुविधाओं सहित केंद्रीय सरकारी अस्पतालों के माध्यम से भी आपूर्ति की जा रही है। अब तक करीह 31 राज्य / केंद्र शासित प्रदेशों में ये उपकरण भेजे जा चुके हैं और जैसे-जैसे बाकी खेप भारत पहुंचेंगी, अन्य राज्यों में भी इनकी आपूर्ति की जाएगी।

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