क्या आप जानते है शाकाहारी खाना दुनिया को बचा सकता है?

क्या आप जानते है शाकाहारी खाना दुनिया को बचा सकता है?

शाकाहारी खाना के लिए वैज्ञानिकों ने एक डाइट प्लान बनाया है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इतनी बड़ी आबादी के लिए भोजन की आपूर्ति की जा सके| इसे प्लेनेटरी हेल्थ डाइट कहा गया है| इस डाइट प्लान में मांसाहारी भोजन और डेयरी उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है|

हालांकि, ये सुझाव दिया गया है कि लोगों को प्रोटीन की आपूर्ति के लिए फलियों और दालों की ओर बढ़ना चाहिए| इस प्लान के तहत आपको अपने रोज़ाना के खान-पान में से उन ज़्यादातर चीज़ों को निकालना होगा जिन्हें आप अक्सर खाते हैं| और उन चीज़ों को शामिल करना होगा जिन्हें कम खाते हैं|

खानपान में कैसे आएगा बदलाव :-

अगर आप हर रोज़ मांस खाते हैं तो कम करने वाली सबसे बड़ी चीज़ तो यही है| अगर आप रेड मीट खाते हैं तो हफ़्ते में एक बर्गर और अगर जानवरों की आंतों से बनी डिश खाते हैं तो महीने में सिर्फ एक बार आपको ऐसी चीज़ें खानी चाहिए|

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हालांकि, आप मछली से बने कुछ खाने का लुत्फ हफ़्ते में कई बार ले सकते हैं और हफ़्ते में एक बार ही चिकन खा सकते हैं| लेकिन इसके अलावा आपको प्रोटीन की आपूर्ति सब्जियों से करनी पड़ेगी| शोधकर्ता दालें और फलियां खाने की सलाह देते हैं| हालांकि, स्टार्च वाली यानी कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति करने वाली सब्जियां जैसे आलू और अरबी की कटौती करनी होगी|

क्या फिर खाना बेस्वाद होगा ?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर वॉल्टर विलेट भी इस मुद्दे पर किए गए शोध में शामिल रहे हैं| खेतों के बीच अपना बचपन बिताने वाले प्रोफेसर विलेट कहते हैं कि वह दिन में तीन बार रेड मीट खाते थे, लेकिन अब उनके खाने पीने की शैली प्लेनेटरी हेल्थ डाइट के मुताबिक़ ही रही है| विलेट अपनी इस बात को उदाहरण देकर समझाते हैं, “वहां पर खाने की चीज़ों की तमाम किस्में होती थीं| आप इन चीज़ों को अलग- अलग तरह से मिलाकर कई डिश तैयार कर सकते हैं|”

इस तरह से दुनिया बचेगी क्या ?

शोधकर्ताओं का उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को भोजन की आपूर्ति करना थी| लेकिन एक उद्देश्य ये भी था कि ऐसा करते हुए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जाए, किसी जीव को विलुप्त होने से रोका जाए, खेती योग्य भूमि के विस्तार को रोका जाए और जल संरक्षण किया जाए| हालांकि, खान-पान की शैली बदलने से ये उद्देश्य पूरा नहीं होगा| ऐसा करने के लिए खाने की बर्बादी को रोका जाना और खेती में इस्तेमाल की जा रही ज़मीन में ज़्यादा से ज़्यादा अनाज़ पैदा करना ज़रूरी है|

मांसाहार पर प्रतिबंध :-

प्रोफेसर विलेट कहते हैं, “अगर हम सिर्फ ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की बात कर रहे होते तो हम कहते कि सभी लोग शाकाहारी हो जाएं| लेकिन ये स्पष्ट नहीं था कि शाकाहारी खाना सबसे स्वास्थ्यप्रद भोजन था|” ईट-लांसेट आयोग अपने इस शोध को लेकर दुनिया भर की सरकारों और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं के पास जाएगी ताकि ये समझा जा सके कि ये संस्थाएं खानपान की शैली में बदलाव की शुरुआत कर सकती हैं या नहीं|

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Image Source : Google

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