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खतरे में है धरती, धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं ये प्राकृतिक संसाधन

खतरे में है धरती, धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं ये प्राकृतिक संसाधन

हमारी धरती दिन प्रतिदिन विनाश के तरफ बढ़ती जा रही है और हम इसके लिए कुछ नहीं कर पा रहे है| देख रहे है, सुन रहे है और बस देख-सुन के चुप हो जाते है| हवा प्रदूषित हो रही है| पानी दूषित हो रहा है, प्लास्टिक हमारी मिट्टी को खराब कर रहे है| धरती से धीरे-धीरे प्राकृतिक संसाधन गायब हो रहे है, संसाधनों के गायब होने का मुख्य कारण देखे तो वह हमारी बढ़ती आबादी है जिसे काम करना बहुत ज़रूरी है|

आज हम उन्हीं संसाधनों के बारे में आपको बताएंगे

  • पानी

जी हाँ कहा जाता है कि जल ही जीवन है और हम इसे मानते भी है लेकिन ये जीवन दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है, दुनिया में जितना पानी है उसमें सिर्फ़ 2.5 प्रतिशत ही ताजा पानी है और इस 2.5 प्रतिशत हिस्से का आधा हिस्सा बर्फ के रूप में है| उपलब्ध ताजा पानी का 70 प्रतिशत हिस्सा खेती के लिए इस्तेमाल होता है| अनुमान यह है कि 2050 तक दुनिया का दो-तिहाई हिस्सा पानी की कमी का सामना करेगा| अगर हमने पानी की बचत नहीं की तो बहुत जल्द हमारे पास पीने के लिए एक बूंद भी पानी नहीं बचेगा|

  • जमीन

जमीन जो हमें रहने को जगह खाने को खाना देती है वह हमारी इस लिस्ट में शामिल है| किसी ने सही ही कहा है जमीन अब सोना बन गई है और हम सबको यह पता है कि जमीन के पीछे सारी दुनिया पागल है| लेकिन जैसे-जैसे दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है, उपलब्ध जमीन कम होती जा रही है| बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएँ इस समस्या को और बढ़ा देती हैं| चीन और सऊदी अरब अफ्रीका में जहाँ के देशों की जनसंख्या ज़्यादा है वहाँ खेती के लिए कम जगह रह गई है| सरकार जमीन की तलाश कर रही हैं| जमीन अब नया सोना बन गई है|

  • जीवाश्म ईंधन (डीजल, पेट्रोल, कैरोसीन, गैस)

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बढ़ती आबादी के साथ जैसे हमारे पास ना रहने को जगह और ना ही पीने को पानी है वैसे ही हमारे पास से जीवाश्म ईंधन है वो भी गायब होते जा रहा है| जीवाश्म ईंधन लाखों सालों तक अवशेषों के जमीन में दबे रहने के कारण से बनता है| लेकिन जिस तरह हम जीवाश्म ईंधन यानी डीजल, पेट्रोल, कैरोसीन, गैस सबका दोहन हो रहा है उस हिसाब से इन ईंधनों के अवशेष ही रह जाएंगे| अब सबसे बड़ी बात यह है कि इनके ख़त्म होने के बाद उन देशों का क्या होगा जिनकी अर्थव्यवस्था इसी पर टिकी है| उन देशों को इसका हल जल्द से जल्द निकालना होगा| हालंकि इन ईंधनों को दुबारा बनाया भी नहीं जा सकता|

  • मिट्टी

जिस मिट्टी से हम बचपन में खेलते थे वह मिट्टी अब खत्म हो रही है| जैसा कि हम सब जानते हैं प्राकृतिक मिट्टी का निर्माण बहुत ही मेहनत से होता है और जिस प्रकार से पूरे विश्व में निर्माण कार्य के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है, धरती को वक्त ही नहीं मिल रहा कि वह नई मिट्टी का उत्पादन कर सकें| पूर्वी अफ्रीका जैसी विकासशील जगहों पर जहाँ जनसंख्या के 2050 तक दोगुना हो जाने का अनुमान है, वहाँ मिट्टी की भी कमी हो सकती है|

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  • खत्म होती प्रजातियाँ

आपको बता दें कि पैंगोलिन, गेंडे, वकीटा और समुद्री घोड़े खत्म होने की कगार पर पहुंच गए हैं| इंसान अपनी लापरवाहीयों में इस तरह उलझ चुका है कि वह देख नहीं पा रहा कि सही क्या है और ग़लत क्या| जानवरों को इंसान अपने लिए संसाधन की तरह मान रहा है| अगर ऐसे ही इंसान इन जानवरों को अपने संसाधन की तरह देखेंगे और इन्हे मारते रहेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब धरती से कई प्रकार की प्रजातियाँ खत्म हो जाएंगी|

Image Source : Google