July 5, 2020

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मौत का सफर: दो 9 दिन में पहुंच रहीं श्रमिक ट्रेनें, भूख और प्यास से एक दिन में 7 मौतें

मौत का सफर: दो 9 दिन में पहुंच रहीं श्रमिक ट्रेनें, भूख और प्यास से एक दिन में 7 मौतें

ट्रेनों को लेकर लगता है कि रेलवे गंभीर नहीं है

प्रवासियों को उनके जिलों तक छोड़ने के लिए रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रखी है। लेकिन इन ट्रेनों को लेकर लगता है कि रेलवे गंभीर नहीं है। ये ट्रेनें रास्ता भटक जा रही है और कहीं की कहीं पहुंच जा रही है। इससे श्रमिकों की समस्या बढ़ जा रही है। ऐसा ही एक वाक्या सामने आया जिसमें गुजरात के सूरत से करीब 6000 श्रमिकों को लेकर सीवान के लिए निकलीं दो ट्रेन क्रमश: उड़ीसा के राउरकेला और बेंगलुरु पहुंच गईं। इन दोनों ट्रेनों को सीवान 18 मई को ही पहुंचना था। ट्रेन 16 मई को सूरत से निकली थी।
सूरत

सूरत से मजदूरों को लेकर सीवान के लिए चली ट्रेन

जानकारी के अनुसार गुजरात के सूरत से मजदूरों को लेकर सीवान के लिए चली ट्रेन रास्ता भटक गई और वह सीवान आने की बजाय उड़ीसा के राउरकेला चली गई। वाराणसी रेल मंडल द्वारा काफी खोजबीन के बाद इस ट्रेन का पता चला और उड़ीसा से इसे वाराणसी जोन के लिए रवाना किया गया। ट्रेन एक सप्ताह तक दूसरे राज्य के दूसरे रुट में भटकती रही और तीन दिनों की बजाय यह ट्रेन 9 दिनों में सीवान पहुंची। यह ट्रेन गोरखपुर स्टेशन के रास्ते सीवान आने वाली थी।ट्रेन छपरा स्टेशन होकर सोमवार की सुबह 2 बज कर 22 मिनट पर आई।

सूरत ट्रेन 8 घंटे से लेकर 9 दिन तक लेट पहुंच रहीं हैं

यह तो सिर्फ हमनें एक ट्रेन के बारे में बताया अगर आप गूगल करेंगे तो न जाने कितनी श्रमिक ट्रेनों की टाइमिंग का पता चलेगा आप देखेंगे कैसे ट्रेन 8 घंटे से लेकर 9 दिन तक लेट पहुंच रहीं हैं। ये आफत सिर्फ ट्रेन के लेट पहुंचने तक सीमित नहीं रही पहले गरीब मजदूर सड़क दुर्घटनाओं में, पटरियों पर हादसों के शिकार हो रहे थे उनकी जान जा रही थी और अब लोग ट्रेनों में दम तोड़ने लगे हैं। प्रवासियों को उनके जिलों तक छोड़ने के लिए रेलवे की श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का कोई माई-बाप नहीं है।

ईद के मौके पर मातम में डूब गए

ट्रेनें रास्ता भटक जा रही हैं और कहीं की कहीं पहुंच जा रही हैं। नतीजा है कि कोरोना की कौन कहे भूख, प्यास, गर्मी से कई लोगों ने दम तोड़ दिया। इनमें मासूम भी, नौजवान भी और पकी उम्र के लोग भी हैं। कई घर तो ईद के मौके पर मातम में डूब गए।
महाराष्ट्र से आ रहे मजदूर को आरा में लोगों ने जब उठाना चाहा तो पाया कि उसकी मौत हो चुकी है। उसकी पहचान नबी हसन के पुत्र निसार खान उम्र लगभग 44 वर्ष के रूप में की गई। वह गया का रहने वाला था।
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मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान इरशाद की मौत हो गई

पश्चिम चंपारण जिला के चनपटिया थाना के तुलाराम घाट निवासी मो पिंटू शनिवार को दिल्ली से पटना के लिए चले। सोमवार सुबह दानापुर से मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचे। मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान इरशाद की मौत हो गई। पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी और पेट में अन्न का दाना नहीं होने के कारण उन लोगों ने अपने लाड़ले को खो दिया।
महाराष्ट्र के बांद्रा टर्मिनल से 21 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर लौट रहे कटिहार के 55 वर्षीय मो अनवर की सोमवार की शाम बरौनी जंक्शन पर मौत हो गई। अनवर बरौनी ने 10 रुपये का सत्तू खरीद कर खाया और कर्मनाशा से कटिहार जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन पर सवार होने से पहले वह पानी लेने उतरा था, इसी बीच उसकी मौत हो गई।

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सूरत:श्रमिक स्पेशल से दोपहर 1 बजे सासाराम पहुंची

सूरत से श्रमिक स्पेशल से दोपहर 1 बजे सासाराम पहुंची महिला ने पति से कहा भूख लगी है। स्टेशन पर ही पति के सामने नाश्ता किया और उसके बाद कांपने लगी। पति की गोद में ही उसने दम तोड़ दिया। वह ओबरा प्रखंड के गौरी गांव की रहने वाली थी। महिला की मौत होते ही सासाराम स्टेशन पर कई लोग इधर-उधर भागने लगे। पति ने कहा मैं नि:सहाय क्या करता?
महाराष्ट्र से आ रहे एक श्रमिक की ट्रेन में हालत खराब होने के बाद उसकी मौत हो गई। वह मोतिहारी जिले के कुंडवा-चैनपुर का निवासी बताया जा रहा है। दरअसल, उसकी तबियत खराब होने के बाद उसे ट्रेन से उतारकर जहानाबाद सदर अस्पताल लाया गया। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कानपुर से गया तक बच्चे की लाश के साथ सफर

राजकोट-भागलपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से गया में सोमवार को 8 माह के बच्चे के शव को उतारा गया। परिवार मुम्बई से सीतामढ़ी जा रहा था। आगरा में बच्चे का इलाज हुआ बच्चे की कानपुर के पास मौत हो गई। दंपती देवेश पंडित सीतामढ़ी के खजूरी सैदपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर गांव का रहने वाले हैं। अहमदाबाद से कटिहार जाने वाली ट्रेन मुजफ्फरपुर पहुंची स्पेशल ट्रेन में कटिहार की रहने वाली 23 साल की अलविना खातून मौत हो गई। वह अपने जीजा इस्लाम खान के साथ अहमदाबाद से घर लौट रही थी। जीजा इस्लाम खान का रो-रो कर बुरा हाल था। अलविना विक्षिप्त थी।उसका इलाज चल रहा था|

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