प्लास्टिक- पर्यावरण तथा मनुष्य का थैनोस

प्लास्टिक- पर्यावरण तथा मनुष्य का थैनोस

दिल्ली में सिंगल यूज प्लास्टिक में आग लगाने की सबसे अधिक घटनाएँ घट रही है| लाख कोशिशों के बाद भी पार्कों, कम्युनिटी हॉल इत्यादि में अभी भी इसका इस्तेमाल हो रहा है|

आईपीसीए (इंडियन पॉलियूशम कंट्रोल एसोसिएशन) के मुताबिक सीपीसीबी (सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड) की रिपोर्ट में ये बताया गया है कि भारत का हर व्यक्ति हर वर्ष दस किलो प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है| सबसे ज्यादा यहां सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है| जिसमें ऑनलाइन रिटेलर और फ़ूड डिलिवरी ऐप्स का सबसे पहला नाम है| 80 प्रतिशत प्लास्टिक सिर्फ पैकेजिंग सेक्टर में इस्तेमाल होता है, जिसमें से 60 प्रतिशत ही रिसाइकिल हो पाता है|

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आईपीसीए ने इसके लिए एक मुहिम भी चलाई है, जिसका नाम है 10 केजी प्लास्टिक मुहिम| इसमें उसने कई शहरों में अपने कनेक्शन सेंटर भी खोले है| यहां लोग अपने प्लास्टिक वेस्ट हर महीने भेज सकते है| 2014 की एक स्टडी से ये पता चला है कि दिल्ली में इसके के बैन होने के बाद भी लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे है|

हर व्यक्ति जानता है कि इसका यूज़ कितना हानिकारक है, लेकिन फिर भी इसका इस्तेमाल जोरों से हो रहा है| सबसे ज्यादा प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल फ़ल और सब्जी की दुकानों पर किया जाता है| दिल्ली में 62% व्यापारी और 78% उपभोगता इसे इस्तेमाल करते है| इनमें से 95% वेंडर और 85% उपभोगताओं को बैन होने की जानकारी भी है|

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सीएसई की वेस्ट मैनेजमेंट की प्रोग्रामर मैनेजर स्वाति सिंह साम्ब्याल के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक सालों में माइक्रो प्लास्टिक में बदल जाता है और यह भूजल एवं मिट्टी को प्रदूषित करता है| इसको जलाने पर हानिकारक मेटल निकलता है जिसकी वजह से नई-नई बिमारियाँ पनप रही है|

सिंगल यूज प्लास्टिक रिसाइकल क्यों नहीं हो सकता है?

सिंगल यूज प्लास्टिक का रिसाइकल होना संभव इसलिए नहीं है क्योंकि यह दूषित होता है| इसको रिसाइकिल  करने के लिए पहले इसे धोनाऔर सुखाना पड़ता है| यह सब प्रक्रिया करने में काफ़ी पैसा लगता है इसीलिए हमको इसके इस्तेमाल पर बैन न करके इसके मैन्युफैक्चरिंग पर बैन करना चाहिए, जिससे इसका इस्तेमाल हमारे शहर में पूरे तरीके से बंद हो जाए|  

यूएनईपी की रिपोर्ट

यूएनईपी 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबली सिर्फ 9 प्रतिशत इसका रिसाइकिल होता है और 79 प्रतिशत लैंडफिल साइट में जाता है| भारत के मुताबिक सिर्फ 60 प्रतिशत प्लास्टिक रिसाइकिल होता है लेकिन इससे दूसरी चीजें बनाई जाती है| बल्कि रिसाइकिल का मतलब है कि उससे वही चीजें बने दूसरी नहीं| यानी की बोतल से बोतल ही बने ताकि नया प्लास्टिक जनरेट ना हो|

अंततः हमे ये समझना होगा की प्लास्टिक का इस्तेमाल न सिर्फ हमारे लिए अपितु भावी पीढ़ियों के विकास में बाधक बन सकता है, कैंसर जैसी बिमारियाँ होना ऐसा हो गया है मानो आम बुखार या खाँसी हो| आजकल सभी लोग साक्षर है और वस्तुओं के बारे मे ज्ञान रखते है तो फिर क्यों अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारते है| जितना जल्दी हो सके इसके इस्तेमाल करने से परहेज करे ताकि आप अपनी भावी पीढ़ी तथा पर्यावरण दोनों का संरक्षण करने मे अपनी एक भूमिका अदा कर सके|

Image Source : Google

One Reply to “प्लास्टिक- पर्यावरण तथा मनुष्य का थैनोस”

  1. आपके समाचार पत्र में कई जानकारियां ऐसे होती हैं जो हमने पहले किसी के द्वारा नहीं मिली। धन्यवाद आपका ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए पढ़ाते रहिए

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