July 2, 2020

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मदद तो महत्वपूर्ण है लेकिन मज़दूरों लिए लड़ना होगा – राजेश लिलोठिया

मदद तो महत्वपूर्ण है लेकिन मज़दूरों लिए लड़ना होगा - राजेश लिलोठिया

18 मई से लॉक डाउन का चौथा चरण

Lockdown हुए 52 दिन से ज्यादा हो चुके हैं और 18 मई से लॉक डाउन का चौथा चरण शरू हो रहा है जो अगले 14 दिन और चलेगा मतलब 31 मई तक लेकिन इस लॉक डाउन की वजह से रोज कमाने खाने वाले भारत के करोडों मज़दूर आज सड़कों पर वो किसी न किसी रास्ते इस शहर की भीड़ से भागकर अपने गांव जाना चाहते हैं क्योंकि अब ये शहर उनके खाने रहने की व्यवस्था नहीं कर सकता है|
सरकारें भी अपनी तरफ से कोशिश कर रहीं हैं लेकिन फिर ये मज़दूर सरकार का भरोसा नहीं कर पा रहे हैं लाखों मज़दूरों की समस्याएं आपने अखबार टीवी सोशल मीडिया के ज़रिए सुनी होगी कि उनके पास खाने के लिए पैसे नहीं हैं।सरकार का अपना दावा है सूखा राशन देने का लेकिन कितनों के पास मदद पहुंच रही है इसका अंदाज़ा आप सड़कों पर उतरे उन मज़दूरों की संख्या से लगा सकते हैं।
राजेश लिलोठिया

कांग्रेस: राजेश लिलोठिया ने कुछ प्रवासी मज़दूरों को भोजन के पैकेट वितरित किये

इस दौर में लोगों की परेशानियों को सुनने समझने के लिए बहुत सारे लोग, सामाजिक संगठन ,एनजीओ, विपक्ष के नेता उद्दोगपति मदद करने के लिए आगे आये और लोगों को जितना हो सकता है सब अपने-अपने हैसियत से दे रहें हैं। जो लोग आज सड़कों पर भूखे प्यासे अपने घर के लिए निकल पड़े तो उनकी मदद कर रहें हैं उन्हें खाना – पानी आने- जाने  की कुछ न कुछ व्यवस्था इन संगठनों के द्वारा की जा रही है।ऐसा ही कुछ काम कांग्रेस से नेता भी कर रहें हैं यूथ कांग्रेस की चर्चा तो हर जगह है कि हर ज़रूरत मंद पहुंच रहें हैं।
राजेश लिलोठिया
Delhi Congress के दिग्गज नेता दिल्ली के पटेल नगर विधानसभा से  विधायक रह चुके राजेश लिलोठिया और उनके पुत्र अरमान लिलोठिया भी कर रहें हैं। आज कांग्रेस नेता राजेश लिलोठिया ने कुछ प्रवासी मज़दूरों को भोजन के पैकेट वितरित किये जो मज़दूर सड़क पर पैदल चल अपने घर जा रहें हैं|

तसवीरें उन्होंने सोशल मीडिया में साझा की

उनकी तसवीरें उन्होंने सोशल मीडिया में साझा की हैं और लिखा कि “मैं सैकड़ों प्रवासी कामगारों से मिला जो पैदल अपने घरों को वापस जाने की कोशिश कर रहे थे|भोजन के पैकेट वितरित करते समय, वे मेरे साथ बिहार, कानपुर और झारखंड के अपने मूल स्थानों के बारे में खुल गए। यह सुनना दुखद है कि प्राधिकरण की अक्षमता के कारण वे असहाय और दुखी हैं।वंचितों के अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ना महत्वपूर्ण है, फलस्वरूप मैं संकट में किसी को भी सहायता प्रदान करने के लिए एक पहल शुरू कर रहा हूं।”
राजेश लिलोठिया
आज लाखों मज़दूर परेशान सड़कों पर भूखे-प्यासे चलने को मजबूर हैं लेकिन कुछ ऐसे लोग, संगठन जो इन सबकी मदद कर रहें वो सब इन के घर पहुँचाने में मदद कर रहें हैं वो सब काबिले तारीफ हैं आज हमारे देश में इन सब मज़दूरों की मदद उनके रोजगार की व्यवस्था करना सरकार और उद्दोगपतियों का कर्तव्य है|

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