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हाईकमान जो फैसला करेगी वह हमें मंजूर होगा,अशोक गहलोत

Ashok Gehlot States – हाईकमान जो फैसला करेगी वह हमें मंजूर होगा

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अशोक गहलोत लगातार अपने ही बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं शायद उन्हें लगने लगा है कि उनकी सरकार बिना सचिन पायलट के नहीं चलेगी अगर ज़बरदस्ती चलाने की कोशिश की तो गिर जाएगी… गहलोत न तो सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली न हाई कोर्ट से राहत न राज्यपाल की राहत मिली हर जगह Ashok Gehlot की सिर्फ सुनवाइयां चल रही है|

Ashok Gehlot Statement – अशोक गहलोत बुधवार यानी 29 जुलाई को चौथी बार राज्यपाल से मिले

राज्यपाल कलराज मिश्र ने 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव तीसरी बार लौटा दिया। राज्यपाल ने पिछले 7 दिनों में तीसरी बार राज्य सरकार के प्रस्ताव को लौटाया है। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार यानी 29 जुलाई को चौथी बार राज्यपाल से मिले।गवर्नर ने शर्त रखी थी कि सत्र बुलाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए।
एक मंत्री के अनुसार Ashok Gehlot सरकार फिर से इसे कैबिनेट में ले जाएगी। फिर मुख्यमंत्री जो फैसला लेंगे वह अंतिम होगा। अब राज्यपाल ने तीसरी बार सत्र की मांग ठुकरा चुके हैं इससे पहले कांग्रेस ने राज्यपाल के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया और उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताते हुए ट्विटर पर ‘गेट वेल सून गवर्नर’ अभियान भी चलाया। लेकिन कुछ हुआ नहीं|
Ashok Gehlot

बीजेपी के लोग लगातार पायलट को समर्थन दे रहे

2 दिन पहले पायलट समर्थक मंत्री हेमाराम चौधरी ने दावा किया था कि 15 से ज्यादा विधायक संपर्क में है जैसे ही बाड़ेबंदी हटी हमारे पास आ जाएंगे और सरकार गिर जाएगी इस तरह के दावों से भी अशोक गहलोत का खेमा परेशान है साथ बीजेपी के लोग लगातार पायलट को समर्थन दे रहे बाहर से जिस वजह से शायद अब गहलोत को लगने लगा सचिन के बिना सरकार मुमकिन नहीं है|

बीजेपी के लोग लगातार पायलट को समर्थन दे रहे – Ashok Gehlot

शायद इसी डर से अशोक गहलोत ने कहा कि जिन्होंने पार्टी को धोखा दिया है वह हाईकमान से माफी मांग ले। हाईकमान जो फैसला करेगी वह हमें मंजूर होगा लेकिन हम चाहते हैं वह जनता के विश्वास को नहीं तोड़े।तो क्या ये मान लिया जाए कि अगर सचिन को मुख्यमंत्री बनाने की बात आएगी तो गहलोत तैयार हो जाएंगे ?
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Ashok Gehlot ने कहा कि प्रेम पत्र तो पहले ही आ चुका है

इधर राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात से पहले विधानसभा सत्र बुलाने के लिए गवर्नर की आपत्तियों वाली चिट्ठी पर अशोक गहलोत ने कहा कि प्रेम पत्र तो पहले ही आ चुका है, अब मिलकर पूछूंगा कि क्या चाहते हैं? 21 दिन के नोटिस की राज्यपाल की शर्त को लेकर बोले के कि 21 दिन हों या 31 दिन, जीत हमारी होगी। 70 साल में पहली बार किसी गवर्नर ने इस तरह के सवाल किए हैं। आप समझ सकते हैं कि देश किधर जा रहा है?
Image Source:- www.jansatta.com
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