‘सुपर 30’ मूवी रिव्यू, जाने आनंद कुमार की असली कहानी |

आनंद कुमार

भारत एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा फिल्मे रिलीज होती है और देखी जाती है| फिल्मो को हमेशा उनकी अनोखी कहानी उसे अच्छी और और बुरी बनाती है| फिल्मे आकर्षित और तब बनती है जब असली जीवन के नायकों की कहानियां फिल्मों के जरिए लोगों तक पहुचाई जाती है| यही कोशिश करते हुए विकास बहल अपनी नई फिल्म आनंद कुमार की ‘सुपर 30’ की साथ परदे पर उतरे है|

सुपर 30 एक बायॉग्रफी, ड्रामा फिल्म है, जिसमे रितिक रोशन, मृणाल ठाकुर, पंकज त्रिपाठी, नंदीश सिंह जैसे विख्यात कलाकार मौजूद है| जो की जाने-माने गणितज्ञ आनंद कुमार की जिंदगी पर आधारित है| आनंद कुमार पटना के विख्यात गणित के टीचर हैं| जो निचले वर्ग के अति अभावग्रस्त कुशाग्र बच्चों को फ्री आईएआईटी में दाखिले के लिए फ्री कोचिंग देते थे|

इस फिल्म में दिखाया गया है कि इसको करने के लिए उन्हें कितनी ज्यादा परेशानियों का समना करना पड़ा| इस फिल्म के मह्तवपूर्ण किरदारों की बात करें तो, आनंद कुमार (रितिक रोशन), उनकी प्रेमिका रितु (मृणाल ठाकुर), उनके डाकिया पिता (वीरेन्द्र सक्सेना), उस वक्त शिक्षा मंत्री श्रीराम सिंह (पंकज त्रिपाठी) और कोचिंग क्लासेज के मैलख लल्लन जी (आदित्य श्रीवास्तव) है|

फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी सधा हुआ है| मगर सेकंड हाफ में कहानी थोड़ी मेलोड्रमैटिक करके खिंचा गया है| फिल्म के अनोखे संवाद ‘राजा का बेटा राजा नहीं रहेगा’, ‘आपत्ति से अविष्कार का जन्म होता है’ तालियां पीटने पर मजबूर कर देते हैं| निर्देशक विकास बहल ने फिल्म में बच्चों की भूख, बेबसी और उनके अविष्कारों और विकास की कहानी में इमोशनल ढंग से पेश किया है|

वही ग्रीक गॉड कहलाने वाले रितिक रोशन ने आनंद कुमार के किरदार को काफी अच्छे से निभाया है| शुरूआत के कुछ मिनट देखने पर लगेगा की रितिक का ग्लैमर, टोन मिसिंग है| लेकिन धीरे-धीरे रितिक की शानदार एक्टिंग ने आनंद कुमार के किरदार को काफी मजबूत किया|

पंकज त्रिपाठी ने अपने शिक्षा मंत्री के भूमिका को बखूबी निभाया है और खूब मनोरंजन किया है| वही वीरेन्द्र सक्सेना का पिता का रूप दिल को छू जाता है| नंदीश सिंह प्रणवन कुमार, आदित्य श्रीवास्तव, अमित साद और विजय वर्मा ने अच्छा काम किया है|

निर्देशक विकास बहल की बात करें तो उन्होंने काफी कोशिश की है कि आनद कुमार की कहानी को परदे पर जितने अच्छे से हो सके उतने अच्छे से पेश करें| लेकिन उन्होंने आनंद कुमार से जुड़े विवादों को अपनी कहानी से दूर रखा है| उनसे जुड़े आरोपों का फिल्म में कोई जवाब नहीं मिलता है| विकास बहल की यह फिल्म ऐसे सफर पर ले जाती हैं, जो आंसुओं के साथ उम्मीद भी जगा देती है|

आइये जानते है आनंद कुमार के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण बाते:-

आनन्द कुमार एक भारतीय गणितज्ञ, शिक्षाविद तथा बहुत सी राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय गणित की पत्रिकाओं के स्तम्भकार हैं| उन्हें प्रसिद्धि सुपर 30 कार्यक्रम के कारण मिली| जिसे उन्होंने पटना, बिहार से 2002 में प्रारम्भ किया था| जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाई जाती है|

2018 के आँकड़ों के अनुसार, उनके द्वारा प्रशिक्षित 480 में 422 छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के लिये चयनित हो चुके हैं| डिस्कवरी चैनल ने भी इनके कार्यों पर लघु फ़िल्म बनाई है| उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के मैसच्युसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान तथा हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा उनके कार्यों पर बोलने के लिये निमंत्रण मिला|

आनन्द कुमार का जन्म 1 जनवरी 1973 को पटना, बिहार में हुआ था| उनके पिताजी भारतीय डाक विभाग में क्लर्क थे| उनके पिताजी निजी विद्यालयों के अधिक खर्चों के कारण उन्हें वहाँ पढ़ा न सके|

इस कारण आनन्द कुमार ने हिन्दी माध्यम के सरकारी विद्यालय में दाखिला लिया, जहाँ उन्हें गणित से अत्यधिक लगाव हो गया| स्नातक शिक्षा के दौरान उन्होंने संख्या सिद्धांत पर कुछ पेपर जमा किये| जिसे मैथमैटिकल स्पेक्ट्रम तथा द मैथमैटिकल गज़ट में प्रकाशित किया गया|

उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला सुरक्षित कर लिया मगर पिताजी की मृत्यु तथा खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे दाखिला ले न सके| इस दौरान वे सुबह गणित पर काम करते तथा शाम को परिवार की मदद हेतु माँ के साथ पापड़ बेचने में हाथ बटाते थे| उन्होंने अतरिक्त पैसे कमाने के लिये बच्चों को गणित पढाना भी प्रारम्भ किया|

1992 में उन्होंने गणित पढ़ाना आरम्भ किया| उन्होंने 5000 रूपए प्रति महीने पर एक कक्षा किराये पर ली| अपने संस्थान रामानुजन स्कूल ऑफ़ मैथमैटिक्स की स्थापना की| एक ही वर्ष में दो छात्रों से बढ़कर छत्तीस छात्र हो गये और तीसरे साल के अन्त तक यह संख्या 500 तक हो गयी|

फिर 2002 में उन्होंने गरीब छात्रों के विशेष निवेदन पर, जो कि आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा की महंगी कोचिंगों की फीस नहीं दे सकते थे, सुपर 30 कार्यक्रम प्रारम्भ किया| जिसके कारण उन्हें प्रतिष्ठा मिली|

मार्च 2009 में डिस्कवरी चैनल ने सुपर 30 पर 3 घंटा लम्बा कार्यक्रम दिखाया गया था| इसी वर्ष अमेरिकी समाचार पत्र द न्यूयॉर्क टाइम्स ने आधे पन्ने पर उनके बारे में लेख लिखा था| अभिनेत्री व् पूर्व मिस जापान नोरिका फुजिवारा पटना आयीं| उन्होंने आनन्द कुमार के कार्यों पर एक लघु फ़िल्म बनायी| उन्हें बीबीसी के कार्यक्रमों में भी स्थान मिला है|

उन्होंने अपने अनुभवों के बारे में भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद, कई आईआईटी, ब्रिटिश कोलम्बिया विश्विद्यालय, टोक्यो विश्वविद्यालय, तथा स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में भाषण दे चुके हैं| उनके आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निःशुल्क शिक्षा देने के काम के कारण लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज किया गया है|

टाइम पत्रिका ने सुपर 30 को बेस्ट ऑफ़ एशिया 2010 की सूची में भी स्थान दिया| इन्हें 2010 में इंस्टिट्यूट ऑफ़ रीसर्च एण्ड डाॅक्युमेंटेशन इन सोशल साइंसेस द्वारा एस रामानुजन पुरस्कार दिया गया|

सुपर 30 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष सिपहसालार राशिद हुसैन ने देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान कहा| न्यूज़वीक पत्रिका ने आनन्द कुमार के कार्यों का संज्ञान लेते हुए उनके संस्थान को चार सर्वाधिक अभिनव संस्थान में स्थान दिया| उन्हें नवम्बर 2010 में बिहार सरकार का सर्वोच्च पुरस्कार “मौलाना अबुल कलाम आज़ाद शिक्षा पुरस्कार” से सम्मानित किया गया|

उन्हें जर्मनी के सैक्सोनी प्रान्त के शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया| आनन्द कुमार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द द्वारा “राष्ट्रीय बाल कल्याण पुरस्कार” से भी सम्मानित किया|

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Image Source : Google

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