May 27, 2020

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खत में बताया कि मैं साईकल ले आया हूं… पूरी खबर पढ़िए…..

साइकिल

नमस्ते जी,

मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूँ| हो सके तो मुझे माफ़ कर देना जी,क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं है,मेरा एक बच्चा है उसके लिए मुझे ऐसा करना पड़ा क्योंकि वो (बच्चा) विकलांग है| चल नहीं सकता| मुझे बरेली तक जाना है| आपका कसूरवार|

एक यात्री,

एक मजबूर एव मजदूर

 

 

ये भावुक कर देने वाला पत्र एक प्रवासी मजदूर ने राजस्थान के भरतपुर जिले से एक साइकिल को चुराते हुए लिखा है,साइकिल चुराने से पहले प्रवासी मजदूर ने साइकिल के मालिक को माफीनामा लिखकर अपनी मजबूरी बताई, उसे भरतपुर से 250 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बरेली जिले जाना था| स्पष्ट है कि वो चोरी नहीं करना चाहता था लेकिन अपने विकलांग बच्चे के लिए मजबूर हो गया!

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ऐसा ही मामला दो रोज पहले गुजरात के जूनागढ़ शहर में आया था, जब 5 मजदूरों ने एक रेस्तरां का दरवाजा तोड़कर चावल और आलू की सब्जी पकाने के बाद बिना कुछ चुराए बाहर निकल आए! ऐसे कई किस्से हैं, जहां इन प्रवासी मजदूरों ने ईमानदारी की मिसाल पेश की| लेकिन यहां सरकार के बजाय इन मजदूरों को ही दोषी ठहरा दिया जा रहा है!

ये वही मजदूर हैं, जो आत्मसम्मान के साथ जीने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं| आज उन्हें अपने घर और भूख के अलावा कुछ भी नहीं सूझ रहा,सरकार के लाख कोशिशों के बावजूद इन प्रवासी मजदूरों तक मदद नहीं पहुंच पा रही, जो इन राहत पैकेजों के असल हकदार हैं|

साइकिल

प्रशांत सिंह – टीवी पत्रकार

Image source:-https://www.google.com

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