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UP: गांव बिधा की गढ़ी की कक्षा 8 की 13 वर्षीय छात्रा शिवानी पिछले 6 साल में अलीगढ़ जिले से लेकर आगरा जोन के साथ ब्लॉक स्तर पर हासिल कर चुकी 19 गोल्ड और सिल्वर मैडल। जीते हुए मैडल में 17 गोल्ड और 2 सिल्वर मैडल है। घर की दीवारों पर टंगे मैडल छात्रा के हुनर के साथ प्रतिभा और उसकी काबिलियत को दर्शाते है।मेहनत कर मजदूरी करने वाले मां-बाप भी अपनी इस बेटी पर गर्व महसूस करते है।

शिवानी खो-खो व कबड्‍़डी जैसे खेल के गुर सीखने के लिए अपने घर से साइकिल पर सवार होकर हर दिन कई किलोमीटर दूर तहसील खैर इलाके के कस्बा जट्टारी में अपने कोच दलबीर सिंह बालियान के पास खो-खो और कबड्डी के खेल का गुर सीखने के लिए ग्राउंड में प्रैक्टिस कर अभ्यास करने के लिए जाती है।

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UP: शिवानी अपने गरीब मजदूर मां और पिता के आशीर्वाद के दम पर खो-खो के अलावा कबड्डी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है और दो बार प्रदेशस्तर की प्रतियोगिता में अपने इस जज्बे को दिखा चुकी है। शिवानी के घर की दीवार पर टंगे इन पदकों के बीच एक जगह खाली है। दीवार पर यह खाली जगह उसको हर रोज याद कर उस राष्ट्रीय पदक को लगने का संकल्प लिए है जो उसे आगे बढ़ने को हर पल उसको प्रेरित करता हैैैै। 

छोटी उम्र में अपने बड़ेे सपने को पूरा करने के लिए टप्पल ब्लाक के एक छोटे से गांव बीधा की गढ़ी की रहने वाली 13 वर्षिय किशोरी शिवानी ने पिछले करीब छह साल से अपनी दिनचर्या ही बदल दी है। शिवानी एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है और कक्षा आठ की छात्र है। तो वही एक बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। शिवानी के पिता राकेश कुमार हरियाणा के गुड़गांव के अंदर एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। तो मां मंजू देवी दूसरोंं के खेतों में मजदूरी कर बटाई पर काम कर अपना और अपने बच्चों का भरण पोषण करती है। शिवानी की एक नौ वर्षीय छोटी बहन भूमि सरकारी स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा और 11 वर्षीय छोटा भाई शेखर क्षेत्र के प्राइवेट स्कूल में कक्षा सात का छात्र है।

UP: जब महंगाई की इस दौड़ में पढ़ाई और घर का खर्चा माता-पिता की मेहनत से होने वाली आय से पूरा न हो पाया तो तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी शिवानी ने भी हाथ में दरांती थाम ली। करीब तीन साल से वह भी मां के साथ खेतों मजदूरी करने में लगी हुई है। शुरू से ही मां के साथ रहने के चलते वह दरांती चलाना सीख चुकी थी। अब फसल में पानी लगानेे के साथ ही खेतों में फसलों की बोआई से लेकर खेत में खड़ी फसल के लहलाने के बाद पक चुकी उस फसल को काटते हुए उसके कई घंटे खेती में कैसे और कब बीत जाते शिवानी को पता ही नहीं चलता। लेकिन इस बीच खुद के बनाए टाइम टेबल को वह नहीं भूलती है। हर रोज सुबह चार बजे उठकर पहले पढ़ाई करती और फिर गांव में ही तीन से चार किलोमीटर दौड़ लगाती हैं। इसके बाद जट्टारी में  कोच दलबीर सिंह बालियान के निर्देशन में प्रैक्टिस करती है।

बेटी होने पर गर्व महसूस करते है मां-बाप

UP: दिन के तपते सूरज की जमीन पर चारो तरफ खुले आसमान में खेतों में पक कर तैयार हो चुकी गेंहू की फसल काट रही एक मां से जब उसकी खिलाड़ी बेटी शिवानी के बारे में बात की गई तो मंजू देवी ने बताया उनकी बेटी शिवानी कक्षा 8 में पढ़ने के साथ कबड्डी भी खेलती है। अलीगढ़ के नुमाईश ग्राउंड में पिछले 5 साल से लगातार गोल्ड मेडल जीतने के साथ आगरा जोन सहित टप्पल ब्लॉक स्तर पर भी खेल चुकी है। तो पति गुड़गांव में एक ओपो कंपनी में मजदूरी करने का काम करते है। जहा दादालाई 8 बीघा जमीन है। पति राकेश कुमार सहित तीन भाई है। जिसमें मंजू देवी के पति राकेश कुमार तीनो भाईयो में दूसरे नम्बर के है। जिनके हिस्से में करीब ढाई बीघा जमीन है। मंजू देवी एक आशा के तौर पर  नोकरी करती है जिसके बदले 2200 रुपये मिलते है। साथ ही मंजू देवी ने बताया खेती से ही परिवार और बच्चों का खर्चा चलता और पालन पोषण होता है।

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अलीगढ़ गांव छोटा नाम बड़ा,13 साल उम्र और 19 मैडल,17 गोल्ड 2 सिल्वर मैडल

UP: शिवानी से हुई बातचीत के दौरान बताया कि वह टप्पल ब्लॉक के एक गांव बिधा की गढ़ी में रहती है और कक्षा 8 की छात्रा है। 13 साल की उम्र में अबतक 19 मेडल जीते है जिसमें 17 गोल्ड मैडल और 2 सिल्वर मेडल है। चार भाई-बहन में एक भाई शेखर सहित तीन बहने है। जो सभी उससे छोटे है। साथ ही शिवानी की आर्थिक स्थिति के चलते खेतों में मां के साथ मजदूरी करने के साथ बहन और भाई में बड़ी होने के चलते एक जिम्मेदारी के साथ घर भी संभालना पड़ता है। खेलने के लिए वक्त और समय दोनो की जरुरत पड़ती है। लेकिन आंखों में एक उम्मीद होती है की वहां पहुंच कर खेलना है और अपने खेल का हुनर दिखाने के साथ कुछ लक्ष्य भी हासिल करना पड़ता है। लेकिन जब घर का जरूरी काम होता है उसके लिए कोच से छुट्टियां मांग ली जाती है। घर से सुबह 8 बजे कोचिंग जाने के बाद शाम 5 बजे छुट्टी होती है। ट्रेनिंग में करीब 12 से 14 और बच्चे भी प्रैक्टिस में शामिल होते है।

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जट्टारी कस्बे में कब्बड्डी की एक छोटी एकेडमी चलाने वाले दलवीर सिंह बालियान कबड्डी के कोच है। इलाके में छिपी हुई उन प्रतिभाओं को निखारने ने का काम इनके द्वारा लगातार पिछले चार साल से किया जा रहा है। जहा आज भी समाज में बेटियों को बहुत ही पीछे समझा जाता है। समाज की इन बेटियों के लिए ये काम किया जा रहा है। उनकी खेलने के साथ पढ़ाई की क्षमता के अनुरूप इस एकेडमी में कार्य होता है।अपने बनाये शेड्यूल के अनुसार 8 से 9 बजे के बीच एकेडमी में बच्चे-बच्चियां प्रेक्टिस के लिए पहुंच जाते है। 


UP: जिसके लिए पहले सभी बच्चों को उनकी पढ़ाई की व्यवस्था कर रखी है जिसमें ज्यादातर बच्चियां 8th क्लास की है जिनकी से 9th और 10th क्लास की तैयारी भी कोच के द्वारा ही कराई जाती है। जहा खिलाड़ियों को 10th क्लास में बोर्ड एग्जाम होने के चलते पढ़ने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है और उनकी पढ़ाई बेकार ना हो कोरोना काल में पिछले साल स्कूल बंद और छुट्टियां होने पर खिलाड़ियों को उनके घरों से बुलाकर लगतार कोच के द्वारा करीब 2 से 3 घंटे पढ़ाई कराने के बाद 3 से 4 घंटे ग्राउंड पर ले जाकर डेली प्रेक्टिस और अभ्यास उन खिलाड़ियों की कराई जाती है। 

इन खिलाड़ियों में करीब 16 से 17 बेटियां बहुत ही निम्न परिवार से ताल्लुक रखती है। जिसमें एक बच्ची ऐसी है उसके पिता मजदूरी करते हैं और वो 6 बहने है। और दो बेटियां ऐसी है जिनके सिर से बाप का साया नही और ना ही उनके पास कोई जमीन है बहुत ही मध्यम वर्गीय परिवार से है लेकिन कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी है। मां लोगो के कपड़े सिलने का काम करके अपने घर का चूल्हा जलाकर अपना खर्च और अपनी दोनो बेटियों का खर्चा चलाने के साथ भरण पोषण करने का काम करती है। 

UP: कबड्डी में इन दोनो राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को कोच के द्वारा इनकी मां से दोनों बेटियों को गोद लिए हुए हैं उनकी पढ़ाई से लेकर कोई भी खर्चा खुद कोच  स्वयं उठाते हैं। 
तो वही खिलाड़ी शिवानी के अंदर एक बहुत ही बड़ी प्रतिभा छिपी हुई है जो लगातार 4 साल से अपनी टीम को अलीगढ़ नुमाईश ग्राउंड में प्रत्येक साल एक प्रतियोगिता होती है। जिसमें कबड्डी, खो-खो,एथलीट,और कुश्ती होती है। जिस प्रतियोगिता में खो-खो और कबड्डी में लगातार गोल्ड मैडल जीतते हुए आ रहे है। जहा खिलाड़ी शिवानी लखनऊ स्टेट तक खेल चुकी है और अभी अंडर 14 खेल रही है।

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