Yellow fever: a unique disease

पीला बुखार (yellow fever) : एक अनोखी बीमारी

आईये हम सबसे पहले ये जान लेते है कि पीला बुखार क्या होता है? अगर आप नहीं जानते है तो हमारे इस लेख को जरूर पढ़े| इस लेख में हम आपको पीले बुखार के बारे में सारी जानकारी देंगे जैसेकि उसके लक्षण, कारण, इलाज़|

पीला बुखार क्या है?

यह एक वायरल फीवर है जो की स्‍टैगोमिया नामक मच्‍छर के काटने से मनुष्य के शरीर में फैलता है| यह बीमारी सबसे ज्यादा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में पायी जाती है| जो लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते है, उनमें से लगभग 50% लोगों की मौत हो जाती है| आमतौर पर इसमें पीलिया के लक्षण भी पाए जाते है| इसमें त्वचा का रंग पीला और आंखों में पीलापन दिखाई पड़ने लगता है| पीला ज्वर आरएनए वायरस से फैलता है| यह एक सं‍क्रमित रोग है|

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इस रोग को पैदा करने वाले मच्‍छर बंदरगाहों और जहाज के आसपास पैदा होते हैं इसलिए इनको बंदर-मच्‍छर भी कहा जाता है| पीले बुखार आमतौर पर तीन से छह दिन के बीच अचानक बढ़ने लगता है| इसमें अधिक पेट दर्द होने से पीलिया बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है जो कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरनाक साबित होता है|

ये बुखार 3 प्रकार का होता है- हलका, तीव्र तथा दुर्दम्य|

-हलके में 3 से 4 दिन तक बुखार रहता है साथ ही सिर दर्द, वमन, आदि की समस्या भी होती है|

-तीव्र में बुखार का तापमान बढ़ने लगता है तथा पीलिया प्रकट होने लगता है साथ ही उल्टी होती है|

-दुर्दम्य में इस अवस्था में रोग 10 दिन तक रहता है| ये बुखार अगर घातक ना हुआ हो तो रोगी धीरे- धीरे खुद को स्वस्थ्य महसूस करने लगता है| इस महामारी में घातकता 10 से लेकर 70 प्रतिशत तक देखी जा सकती है|

पीला बुखार के अवस्थाएं :-
  1. क्रियाशील अवस्था :- स्वस्थ शरीर को जब रोग अपने चपेट में लेता है| उस अवस्था को क्रियाशील अवस्था कहते है| सर्दी लगने के साथ बुखार होना, नींद न आना, शरीर दर्द करना, शरीर सुस्त पड़ना व जी मचलना लक्षण होते है|
  2. आनाकानी अवस्था :- इस अवस्था में रोगी का बुखार कम हो जाती है| शरीर का दर्द कम हो जाता है व अन्य लक्षणों में भी कमी आ जाती है| इस अवस्था में रोगी की ठीक से देखभाल की जाए तो वह ठीक हो सकता है|
  3. दुर्बल अवस्था :- इस अवस्था में मरीज के शरीर का तापमान वापिस बढ़ जाता है| पीलिया हो जाना, काले दस्त लगना, पेशाब बंद हो जाना, शरीर ठंडा पड़ जाना और होश खो देना ये अवस्थाएं होती है

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पीला बुखार के लक्षण :-

-बुखार
-सिर दर्द
-भूख ना लगना
-चक्कर आना
-चहरे, जीभ या आँख का लाल होना
-जी मचलना
-उलटी आना
-शरीर में दर्द होना
-पेशाब कम आना
-नाक, मुँह या आँख से खून आना
-शरीर का पीला पड़ना
-पेट दर्द होना और कभी-कभी खून की उलटी आना
-दौरे पड़ना या भर्म होना

पीला बुखार के कारण :-

-जब संक्रमित मच्छर पीलिया से पीड़ित मनुष्य को काटता है| तो वायरस उसके रक्तप्रवाह में घूमते-घूमते लार उत्पन्न करने वाली ग्रन्थियों में जाकर रुक जाता है| जहां से ये रोग उत्पन होता है|

-सक्रमित सुई किसी दुसरे मनुष्य को लगाने से भी यह रोग फैल जाता है|

पीला बुखार का इलाज :-

पीला बुखार का कोई विशेष और एकमात्र इलाज नही है| उसके शारीरिक टेस्ट और मानसिक स्थिति के आधार पर दवाईयां दी जाती है| स्वयं चिकित्सक मत बनिए यह एक गंभीर रोग है|

  1. (येलो फीवर वैक्सीन) यह टिका मनुष्य के शरीर को इस खास प्रजाति के रोगी जीवाणुओं से लड़ने की ताकत देता है| दक्षिण अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में इसे गंभीर रूप से लिया गया है| यदि हम इन देशों में जाएंगे तो ये टिका लगवाना जरूरी है| क्योंकि वहां इस रोग का प्रकोप ज्यादा है| यह टिका 9 महीने से कम आयु के बच्चे को नहीं लगता|
  2. (वाईफ-वाक्स) यदि रोगी कोई अन्य दवा ले रहा है, तो इसके विपरीत परिणाम हो सकते है| यह दवा पीत-ज्वर को रोकने के लिए बहुत जरुरी है|
  3. प्रातःकाल, सायंकाल और सूर्यास्त के बाद बाहर ना जाएं|
  4. ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का सेवन करें|
इन चीजों का सेवन ना करें :-

-तेल, मसालेदार और मीठा भोजन ना खाएं|

-भारी भोजन जैसे मछली, मुर्गी और मांस को अपने खाने में शामिल ना करें|

-वसा युक्त जैसे घी, मक्खन, क्रीम और तेल से बनी चीजों से बचें|

-शराब का सेवन भूल से भी ना करें ये आपके लिए जानलेवा हो सकता है|

Image Source : Google

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